Monday, 19 December 2011

रविवार की शाम रही कविता के नाम

 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय द्वारा अपनें  रजत जयंती वर्ष  में रविवार की शाम दिनांक १८ दिसंबर को ,संगोष्ठी भवन में भव्य कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया.इस कवि सम्मलेन में जनपद के कवियों ने अपनी   रचनाओं  के माध्यम से जहाँ एक ओर वर्तमान सामाजिक परिदृश्य  को प्रस्तुत किया वहीं दूसरी ओर उनकी रचनाओं नें  श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया.
कवि सम्मलेन  में बतौर अध्यक्ष  कुलपति प्रो सुंदर  लाल जी ने वर्तमान सामाजिक दौर में भ्रष्टाचार की अकथ कहानी पर अपनी रचना प्रस्तुत करते  हुए प्रश्न किया कि-- 
अन्ना के अनछुए अन्न से अन्ना बीज बन गए अनंत.
भ्रष्टाचार की क्षुधा  वाहिनी क्या सब खा जाएगी?
और उत्तर दिया कि --
देश रहेगा, वेश रहेगा ,यू हीँ  पवन बहेगी.
लालू चारा नहीं चरेगा,धनिया ढूध दुहेगी. 
इसी  क्रम में कवि सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने कहा कि -
देश के नन्ना -खडे हैं अन्ना,कहते लोग हजारे हैं.
-बच्चे बूढे नौजवान के होठों पर यह नारे हैं.
 डॉ पी सी विश्वकर्मा (प्रेम जौनपुरी ) ने अपनी बात को रचनाओं के माध्यम  से कुछ यूँ रखा-
गुफ्तगू करने से पहले कम से कम यह जान ले ,
गलती हो जाये अगर चुप चाप गलती मान ले .
डॉ पंकज सिंह ने बात करने की वकालत करते हुए कहा कि -
अँधेरा मिटाने  की बात करो, नशेमन बचाने  कि बात करो
बातों  ही बातों  में बातें बनेगी,किसी भी बहाने बात करो.
 डॉ प्रतीक मिश्र ने मुस्कराने की सीख  देते हुए कहा -
फूलों से मुस्कराना सीखो,अपनी जड़ जमाना सीखो.
 डॉ ब्रजेश यदुवंशी ने सांप्रदायिक सदभाव पर कहा कि-
ईद हमारी धरती हैं होली हैं आकाश , 
हिन्दू -मुस्लिम भाई भाई अपना हैं विश्वास. 
 सत्य प्रकाश अनाम ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि-
ढूढो तो कुछ मिल जायेगा सबकी आम कहानी में ,
सागर भी है आग छुपाये -अपने खारे पानी में. 
 कवि सम्मलेन में कविता के माध्यम से कवियों ने पूरे माहौल को गर्म जोशी से भर दिया  जिसका आनन्द देर रात तक श्रोता लेते रहे।

इस मंच से जनपद के यशस्वी  रचनाकार एवं कवि अजय कुमार ,शायर जौनपुरी ,अंशार साहब, कृष्ण कान्त एकलव्य, देवेन्द्र विमल , गिरीश श्रीवास्तव , आकिल जौनपुरी, राम राज गौतम , डॉ आर एस सिंह , ओम प्रकाश मिश्रा , फहमिद  जैदी और  डॉ संदीप सिंह ने भी काव्य पाठ किया.कवि सम्मलेन का प्रारंभ रचनाकार   देवेन्द्र विमल के सरस्वती वंदना से हुई . संचालन  सत्य प्रकाश अनाम ने किया. प्रो राम जी लाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, अधिकारी , कर्मचारी समेत छात्र छात्राएं उपस्थित रहे.



                                                              

Tuesday, 6 December 2011

फ़्रन्टियर इन बायोलाजिकल साइंस विषयक राष्ट्रीय कांफ्रेंस का हुआ आयोजन

संबोधित करते कुलपति  प्रो सुन्दर लाल जी 
ऐसा प्रयास किया जाए कि गणित  का उपयोग जीव विज्ञान में किया जा सके उक्त विचार  कुलपति प्रो. सुंदर लाल जी के हैं जो   ४ दिसम्बर  को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में फ्रोंटियर  इन बायोलाजीकल साइंस विषयक राष्ट्रीय कांफ्रेंस  के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे उन्होंने  कहा  कि मूलत: बायोलाजी केमिस्ट्री है और केमिस्ट्री फिजिक्स है। फिजिक्स का मूल आधार गणित है। यदि बायोलाजी को गणित में शामिल किया जाए तो बायोलाजी को नई दिशा दी जा सकती है। मैथमेटिक्स मैन मेड यूनिवर्स है जबकि बायोलाजी नेचर मेड यूनिवर्स है। 
डॉ लाल जी सिंह को स्मृति चिन्ह प्रदान करते कुलपति जी   
बीएचयू के कुलपति  प्रो. लालजी सिंह ने कहा कि जाति विशेष में विवाह होने के कारण जीन म्यूटेशन से होने वाली बीमारियां केवल उसी जाति में देखने को मिलती हैं। जो एक स्थान तक सीमित होती हैं। जब कि अन्य स्थानों पर उस बीमारी के कोई लक्षण नहीं मिलते हैं।



व्याख्यान देते डॉ लाल जी सिंह 
आनुवंशिक विभिन्नता (जेनेटिक डायवर्सिटी) पर प्रकाश डालते हुए प्रो.  सिंह ने कहा कि मानव जाति की विविधता के लिए एसएनपी (सिंगल न्यूक्लियोटाइड पालीमार्फिजन) ही जिम्मेदार है। जेनेटिक डायवर्सिटी एनालिसिस द्वारा रोगों का उपचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीनोम फाउंडेशन जेनेटिक बीमारियों के उपचार का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।

प्रो बी एस श्रीवास्तव को स्मृति चिन्ह देते कुलपति जी
इससे पूर्व मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्जवलित कर  कांफ्रेंस की शुरूआत की। कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर एमपी सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन सचिव प्रोफेसर वीके सिंह ने दो दिन तक चलने वाले संगोष्ठी की रूप रेखा पर प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. राम नारायण ने कियाराष्ट्रीय कांफ्रेंस  के दूसरे दिन  समापन सत्र को संबोधित करते हुए  सीडीआरआई लखनऊ के प्रो. बीएस श्रीवास्तव ने कहा कि कांफ्रेंस से शोध को नई दिशा मिलती है। कई क्षेत्रों से आए लोग अपने अनुभव को बताते हैं। नए तथ्य उभर कर सामने आते हैं। हर नया तथ्य शोध की दिशा में सहायक साबित होता है। शोध छात्रों को सेमीनार में हिस्सा लेकर अपनी क्षमता बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। शोध के लिए जितनी भी नई चीजें मिलती हैं वह गुणवत्ता को सुधारने की दिशा में नई पहल होती है।
मुख्य अतिथि को पौध देते प्रो एम पी सिंह  
विश्वविद्यालय  के कुलपति प्रो. सुंदर लाल ने कहा कि कांफ्रेस से छात्रों के साथ   शिक्षक भी अपडेट होंगे। सभी विभागों में इस तरह  का आयोजन किया जाना जरूरी है। आयोजक प्रो. एमपी सिंह ने विज्ञान अनुसन्धान से जुड़ी तमाम जानकारी दी और  कहा कि घर में रखी तमाम बेकार सामानों के सहयोग से मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है। प्रोफेसर वी.के सिंह द्वारा संगोष्ठी में प्रस्तुत शोध पत्रों का सार-संक्षेप  प्रस्तुत किया गया.संगोष्ठी के दौरान  आईजीआईबी नई दिल्ली के डा. अशोक कुमार ने मानव में होने वाले  रोग जनित जीवाणुओं  के बारे में जानकारी दी। प्रो. एच कुमार ने स्वास्थ्य से जुड़ी तमाम जानकारी दी। प्रो. नंदलाल ने टीशू कल्चर जैव प्रोद्योगिकी की जानकारी दी। प्रो. आरके मिश्र एवं प्रो राजीव शर्मा की अध्यक्षता में वैज्ञानिक पोस्टर का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रो. डीडी दुबे, प्रो. बी.बी तिवारी, प्रो.रामजी लाल,  डा. वंदना राय, डा. राजेश शर्मा, डा. एसपी तिवारी,  प्रदीप कुमार, डा. एचसी पुरोहित, डा. एसके सिन्हा, डा. अविनाश पार्थिडकर, संगीता साहू, डा. पंकज सिंह , डा. मनोज मिश्र,दिग्विजय सिंह राठौर ,डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार,उदित नारायण, विवेक पांडेय, डा. सुधीर उपाध्याय, कृष्ण कुमार,  आदि मौजूद थे।

Monday, 28 November 2011

बापू बाज़ार के माध्यम से विद्यार्थी समाज की वस्तुस्थिति को समझ रहे हैं...

बापू बाज़ार के माध्यम से विद्यार्थियों  का अलग तरीके से विकास को रहा हैं जो कक्षा में नहीं हो सकता.इस माध्यम से वह समाज की वस्तुस्थिति को समझ पा रहे हैं.इसके साथ ही उनके व्यक्तिव में विकृतियाँ उत्पन्न नहीं होंगी जो हमें समाज में आज दिखती  हैं. यह विचार वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुन्दर लाल जी के हैं जो डीसीएसके स्नातकोत्तर महाविद्यालय मऊ में २७ नवम्बर को लगे सातवें बापू बाज़ार में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे..
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय या महाविद्यालय का काम  बस इतना नहीं होना चाहिए कि परीक्षा ले और डिग्री देकर छात्रों को समाज में ढ़केल दी.आज महाविद्यालय व समाज के बीच की दूरी  को पाटने  का समय हैं.आज जो लोग इस परिसर में लगे बापू बाज़ार में खरीददारी करने आये हैं वो कभी सोच भी नहीं सकते थे कि इस महाविद्यालय में आयेगे उनके बेंच,कुर्सिया और दीवारों को स्पर्श करेगे.
उन्होंने आगे कहाकि आज समाज में एक तरफ बहुत सारे ऐसे व्यक्ति हैं जिनके पास ढेर सारी सामग्रियां अनुपयोगी पड़ी हैं। वहीं दूसरी तरफ बहुत सारे ऐसे लोग भी हैं जिनका जीवन उन वस्तुओं के अभाव में चल पाना कठिन है। इसी बिंदु को ध्यान में रख करके उन सामग्रियों को एकत्रित कर गरीबों को उपलब्ध कराने का निश्चय किया है। उनका प्रतीकात्मक मूल्य इसलिए रखा गया है ताकि गरीबों का मान सम्मान किसी प्रकार से आहत न हो और उनकी सहायता भी हो जाये.यहाँ से सामानों को खरीदने वाले गर्व से कह सकते हैं कि वो भीख मांग के नहीं लाये हैं बल्कि खरीदकर लाये हैं.
मानव और प्रकृति के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि रोटी, कपड़ा और मकान तीनों की पूर्ति हमें प्रकृति से होती हैं.गाँधी जी ने कहा था प्रकृति से अपनी आवश्यकता भर ले और उसका तब तक प्रयोग करे जब तक उसका उपयोग हो सकता हैं.प्राकृतिक संसाधनों का पूरा प्रयोग हो इसलिए इस बाज़ार में इस्तेमालशुदा सामानों को लाया गया हैं.बापू बाजार के माध्यम से प्रकृति का सम्मान किया जा रहा .
नए ज़माने के माहौल पर उन्होंने कहा कि बहुत दुखद हैं कहाँ - कहाँ बम हैं हमें नहीं पता  हैं असुरक्षा का भाव सबके मन में रहता हैं. बापू ने अहिंसा का शस्त्र दिया था. बापू की ये सोच हमारे बच्चों के विचार- व्यवहार में आये ये जरुरी हैं
शिक्षक संघ के डा. देवेंद्रनाथ सिंह ने कहा कि यह बाजार आज भी बापू की प्रासंगिकता को प्रमाणित करता हैं.इसके माध्यम से दरिद्रनारायण की सही मायने में सेवा हो रही हैं.प्राचार्य डा. शिवशंकर सिंह ने कहाकि बापू मेले का आयोजन गांधी दर्शन एवं सिद्घांत को साकार करने का एक उपक्रम है।प्रबंध समिति के सचिव गौरी शंकर खंडेलवाल ने कहा कि हम हर गरीब को तो इस बाजार के माध्यम से वस्तुएं तो मुहैया नहीं करा सकते लेकिन जो सन्देश इसमें हैं वो लोगों की सोच बदलने में बहुत कारगर हैं.
एन एस एस समन्यवयक हितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अब तक बापू बाज़ार ने २५००० गरीबों को सामान उपलब्ध हो चुका   हैं.यह  पुनीत कार्य बिना एन एस एस की टीम के संभव नहीं हो पाता.कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि ने सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत के बाद डा. कमलेश राय ने गीत प्रस्तुत किया। इस बापू बाजार में मऊ के महाविद्यालयों की तरफ से स्टाल लगाए गए। 

Tuesday, 15 November 2011

सूचना - सप्रेषण तकनीक द्वारा नारी - सशक्तिकरण


विषय में दो मूल बिन्दु है: नारी सशक्तिकरण एवं सूचना - संप्रेषण तकनीक। नारी सशक्तिकरण के मामले में तो हम निरे ढोंगी है। जिस सांस्कृतिक परम्परा के हम वाहक है उसमें नारी को पूजते हैं ऐसा हम गर्व से कहते है, पर जिस सामाजिक वातावरण में हम रहते है वहां  नारी को घूरते है और अवसर मिलने पर उसका शोषण करते  हैं। स्थूल रूप में ही नहीं समस्त सूक्ष्म भावात्मक रूपों तक में, हम सभी इससे ग्रस्त है। समर्थ एवं प्रभावशालियों से नारी स्थूल रूप में त्रस्त है तो प्रचार माध्यमों द्वारा भावानात्मक रूप में त्रस्त है। नल की टोटी और जो साबुन के रैपर से लेकर मोबाइल और लैपटाप के प्रचार हेतु समाचार पत्र/ इलेक्ट्रोनिक मीडिया नारी के निखार और उसके भावपूर्ण भगिमाओं के प्रसार  का प्रदर्शन करते है, भावानात्मक रूप में शोषित करते है। सीताराम, राधाकृष्ण, उमाशंकर का उदाहरण देने वाला हमारा समाज अनेक सीताओं, राधाओं और उमाओं को उदर में ही समाप्त कर रहा है। देश के हर भाग में, हर धार्मिक समुदाय में हर सामाजिक एवं हर आर्थिक वर्ग में नर-नारी के संख्या प्रतिशत में बढ़ता अंतर इसका प्रमाण है।
सूचना-सप्रेषण तकनीक के प्रसार व्यवहार में हममें गर्व का भाव है। इस तकनीक ने हमारे जीवन , खान-पान , रहन-सहन , आचार-विचार, काम, व्यापार सभी को बदल कर रख दिया है। मोबाइल बिना हम गूंगे , बहरे हैं तो इंटरनेट बिना कूप-मंडूक। नारी सशक्तिकरण जैसी गम्भीर समस्या एवं सूचना-संप्रेषण तकनीक जैसा सशक्त माध्यम, सेमीनार का विषय अत्यन्त व्यापक है और इस पर, इससे सम्बन्धित पहलुओं  पर एक दिन नहीं, सप्ताहों और महीनों विमर्श चल सकता है। मैं कुछ बिन्दुओं पर संक्षेप में कुछ कहना चाहूंगा -
सूचना-सम्प्रेषण  तकनीक एवं नारी सशक्तिकरण पर अधिकांश अध्ययन सशक्तिकरण के दो बिन्दुओं पर केन्द्रित रहे है आर्थिक व राजनैतिक। सशक्तिकरण का राजनैतिक पक्ष तो राजनीति में उलझ गया है और नारी सशक्तिकरण का वास्तविक मुद्दा पीछे खिसक गया है। आर्थिक सशक्तिकरण पर किये गये अधिकांशतः अध्ययन अपेक्षाकृत संपन्न वर्ग की समस्याओं, सूचना-सप्रेषण तकनीक द्वारा उत्पन्न कार्य एवं सेवा क्षेत्र, कार्य स्थलों पर लिंग आधारित भेदभाव तथा नियामक मण्डलों में नारी भागीदारी की अल्पता आदि विषयों पर केन्द्रित रहे है। सामाजिक रूप में उपेक्षित एवं आर्थिक रूप से निर्बल वर्ग की नारियों की समस्याओं का जो एक विशाल संजाल है, उस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। सूचना-सप्रेषण तकनीक सम्पन्न और समर्थ वर्ग की आवश्यकताओं पर जितना केन्द्रित है, सम्पन्नता और सामर्थ्य  की धारा को विपन्नता और निर्बलता के नालो की ओर मोड़ने के प्रयासों में उतना सक्रिय नहीं है - सारा दिन गारा मिट्टी और ईट ढोने वाली, बांस  छील कर टोकरी बनाने वाली, सड़क किनारे फूल और सब्जी बेचने वाली महिलाओं के जीवन को सूचना-संप्रेषण तकनीक ने कितना छुआ और कितना सशक्त बनाया है, विचार का विषय है। दूरदर्शन के माध्यम से परोसे गये मनोरंजन से उसकी थकान कम हो सकती है, कुछ समय के लिए चिन्ता से मुक्ति हो सकती है पर उसका सशक्तिकरण नहीं कर पाती। उसकी गरिमा में वृद्धि नहीं करती, उसकी दूसरों पर निर्भरता में  कमी नहीं करती। निर्धनता उसे सूचना-संप्रेषण उपकरणों की उपलब्धता से दूर रखती है तो निरक्षरता वह भी अंग्रेजी भाषा के प्रति निरक्षरता उसे इन उपकरणों के प्रयोग से दूर रखती है। इस समस्या पर गम्भीर विचार की आवश्यकता है। नारी की निर्धनता, निरक्षरता और नर-निर्भरता शीघ्र समाप्त होने वाली समस्यायें नहीं है इनके निराकरण की अवधि लम्बी है। इसी लम्बी अवधि में नारियों को सूचना-संप्रेषण उपकरण उपलब्ध कराने तथा उपयोग कराने के प्रयास होने चाहिए। यहाँ  एक सुझाव है - हम 1200-1500 रू0 मूल्य का लैपटाप बना सकते हैं तो 50-60 रू0 का मोबाइल सैट भी बना सकते है जिसमें आवश्यक न्यूनतम सुविधायें उपलब्ध हो काल   भेजने, काल  प्राप्त करने तथा फोन बुक को खंगालने जैसी मूलभूत सुविधाओं वाले इस मोबाइल में फोन बुक में प्रविष्टी  शब्दों के बजाय चित्रो से हो सकती है। पुलिस के चित्र पर क्लिक कर वह निर्धन निरक्षर महिला आवश्यकता पड़ने पर अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस स्टेशन से सम्पर्क कर सकती है, नारी के चित्र पर क्लिक कर सहायता के लिए महिला संगठनों से सम्पर्क कर सकती है, नर्स के चित्र पर क्लिक कर डाक्टर से मेडिकल सलाह/सहायता मांग  सकती है, रूपये के चित्र पर क्लिक कर मण्डी से अपनी उपज के दैनिक भाव पूंछ  सकती है, घर के चित्र पर क्लिक कर परिवार से सम्पर्क बनाये रख सकती है, किताब पर क्लिक कर शिक्षा व टीवी पर क्लिक कर मनोरंजन के सूत्रों से जुड़ सकती है। बिना अक्षर-अंक साक्षरता के भी सूचना-सप्रेषण के कुछ साधन वह महिला प्रयोग कर पायें ऐसे प्रयास होने चाहिए।

(उदय प्रताप कालेज, वाराणसी में नवम्बर, 12, 2011 को आयोजित- सूचना - सप्रेषण तकनीक द्वारा नारी - सशक्तिकरण विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी  में बतौर मुख्य अतिथि अपना विचार रखते हुए माननीय कुलपति प्रो.सुंदर लाल जी )

Wednesday, 9 November 2011

गांधी जी के विचारों को मनसा-वाचा-कर्मणा आत्मसात करने की जरूरत

वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में बुधवार को आयोजित संगोष्ठी   'वर्तमान संदर्भो में गांधी की प्रासंगिकता' की   अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो.सुन्दरलाल ने कहा कि 
हर व्यक्ति गांधी बन सकता है। बशर्ते उनके बताए रास्ते पर चलते हुए अपनी जरूरतों को सीमित रखे। उन्होंने कहा कि गांधी ने सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर देश को आजादी दिलाई।  गांधी के विचार  आज और भी प्रासंगिक हो चले हैं . उन्होंने कहा कि  महात्मा गांधी जी के दर्शन,जीवन-मूल्य एवं कर्म की प्रेरणा लेकर इस देश में लाखों गांधी पैदा हुए जिन्होनें अपनें गांव-समाज के लिए कुछ न कुछ अवश्य किया.उन्होंने कहा कि गांधी बनना बहुत आसान है बस मनसा-वाचा-कर्मणा सत्यवादी होने की जरूरत है.

संगोष्टी के मुख्य अतिथि और विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा.प्रेमचंद पातंजलि ने चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा समय में भ्रष्टाचार लोगों की जीवन शैली में शुमार हो गया है। बगैर इसके निवारण के देश और समाज का विकास बाधित है। गांधी जी के हर दर्शन में समस्याओं का समाधान छिपा है। उन्होंने कहा कि मुद्दे शाश्वत हैं। मगर समाधान बदल दिए गए हैं। महात्मा गांधी के बाद से देश में कोई रोल माडल नहीं है। 

संगोष्ठी के वक्ता ,टीडी कालेज के पूर्व प्राचार्य डा.अरुण कुमार सिंह ने कहा कि गांधी के विचार सत्य और अहिंसा के बीच घूम रहे थे। गांधी जी धार्मिक थे, मगर वे धर्म का अर्थ नैतिकता से लगाते थे। श्री सिंह ने कहा कि धर्म ग्रन्थ बुद्धि और नैतिकता से परे नहीं हो सकते। गांधी राजनीति में धर्म के समन्वय के पक्षधर थे। 
गांधीवादी विचारक और संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो.प्रमोद पाण्डेय ने कहा कि गांधी के विचारों के बिना देश में कोई सिस्टम नहीं चल सकता। अफ्रीका में भारतीय होने के नाते अंग्रेजों से जो नफरत व घृणा मिली, जिस पर उन्होंने अपने देश में आकर आजादी का बिगुल फूंका। उन्होंने विदेशी कपड़ों की होली जलाई। हालांकि रवीन्द्र नाथ ठाकुर जैसे कुछ सहयोगियों ने उनके विचारों से असहमति भी जताई। गांधी ने देश के गरीबों व दलितों के मनोविज्ञान को पहचाना था। उन्होंने कहा कि गांधी जी के  विचारों की प्रासंगिकता आज भी है और कल भी रहेगी।
संगोष्ठी का सञ्चालन  डा.पंकज सिंह द्वारा किया गया. छात्र कल्याण अधिष्ठाता  प्रो.रामजी लाल नें उपस्थित सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया.इस मौके पर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक गण,प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारीगण सहित समस्त विद्यार्थी उपस्थित थे.  


Tuesday, 1 November 2011

बापू के आदर्शों की आज समाज को जरूरत

३०अक्टूबर को  चौधरी चरण सिंह किसान महाविद्यालय जखनिया गाजीपुर में विश्वविद्यालय के   राष्ट्रीय सेवा योजना  द्वारा आयोजित  बापू बाज़ार में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुन्दर लाल ने कहा कि बापू के विचारो को अपने व्यक्तित्व में समाहित करें.. बापू के आदर्शों की आज समाज को जरूरत हैं. बापू ने दरिद्रनारायण की बात की थी . हमें भी अपना काम करते समय इनका  ध्यान रखना चाहिए.कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए  उन्होंने कहा कि हमें समाज के साथ जुड़ना होगा. हम दूसरों की अगर मदत करते हैं , सहायता करते हैं तो उसमें   सम्मान के भाव को समाहित करना होगा.
बापू बाजार में बतौर मुख्य अतिथि गलगोटिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो के एम त्रिपाठी ने  कहा कि आज उन्होंने कहा कि समय किसी का इंतजार नहीं करता. बापू बाज़ार में जो उत्साह दिख रहा हैं वो समय के साथ कभी कम नहीं होना चाहिए.बापू बाज़ार के माध्यम से पढ़ने वाले बच्चे जिस तरीके से समाज से सीधे जुड़ रहे हैं आज के समय में यह बहुत ख़ुशी की बात हैं.जो कुछ मैनें देखा  देखा वह  भाव विभोर कर देने वाला दृश्य  है. यह बापू बाज़ार महायज्ञ है इसमें हम सभी  मिल कर आहुति दे. यह बीज जो बोया गया हैं उसे मिलकर बड़ा करे. 
राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य संपर्क अधिकारी डॉ सत्येन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि एन एस एस से जुड़ने के  बाद यह हमारा कर्तव्य बनता हैं कि हम खुद भी जागरूक बने और दूसरों को भी जागरूक करे.श्री सिंह ने बहुत मार्मिक ढंग से नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारियों से अपील की.
 चौधरी चरण सिंह किसान महाविद्यालय जखनिया गाजीपुर के प्रबंधक हरिनारायण यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा बापू बाज़ार लगाने का मुझे जो सौभाग्य प्राप्त हुआ हैं वह मेरे लिए गर्व की बात है.राष्ट्रीय सेवा योजना के डॉ हितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आज बापू बाज़ार में जिन लोगों ने भी अपना योगदान दिया हैं उन्हें गरीबों की दुआएं मिलेगी. उन्होंने कहा कि बापू बाज़ार अब तक हजारों गरीबों को आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करा चुका हैं.बापू बाजार में ५० महाविद्यालयों  के  राष्ट्रीय सेवा योजना के  स्वयंसेवक   द्वारा जुटाये गए सामान को २-१० रुपए के प्रतीकात्मक मूल्य पर दिया गया. अपने मनपसंद के कपड़ो को लेने के लिए बूढ़े, बच्चे, महिलाएं एवं अन्य काफी उत्साहित दिखे. बच्चों को मुफ्त में खिलौने,कापी व किताब दिए गए.कोई बच्चा गुडिया पाकर खुश था तो कोई खिलौना  कार.बाजार से वापस जाते समय उनके चेहरे पर विजय भरी मुस्कान थी. 








Thursday, 20 October 2011

एक दीपक विश्वविद्यालय के नाम भी.....

आज संगोष्ठी भवन में सम्मानित अध्यापक बंधुओं ,सम्मानित अधिकारीगण और सम्मानित कर्मचारी बंधुओ को आम सभा के जरिये संबोधित  करते हुए आदरणीय कुलपति जी नें सभी के प्रति शुभ दीपावली की मंगल कामना के साथ कहा कि  इस महान पर्व पर असंख्य दीपों के साथ आप सभी एक दीपक विश्वविद्यालय के नाम भी जलाएं जो कि हमारी ईमानदारी,अनुशासन प्रियता  और विश्वविद्यालय के प्रति समर्पण-निष्ठा का प्रतीक हो तथा यह प्रकाश पूरे समाज में फ़ैल कर विश्वविद्यालय के प्रति लोंगों में सकारात्मक सन्देश दे. उन्होंने कहा कि समाज में हम आज तभी आदरणीय बन सकते हैं जब हम सभी में अनुशासन ,समर्पण और लगनशीलता होगी.आम सभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 24 वर्षो के अपने कार्यकाल में विश्वविद्यालय नें   प्रदेश ही नहीं देश में अपनी ख्याति अर्जित किया है। विवि का यह नाम सभी के सहयोग, कर्मठता के बल पर ही मिला है।  अगले वर्ष विवि अपनी रजत जयंती मनायेगा, जिसमें सभी की सहभागिता एवं सुझाव अनिवार्य है।आज आप सभी के सहयोग से हमने विश्वविद्यालय में कई एक नई पहल की है जिसके सकारात्मक परिणाम भी देखनें को मिल रहे हैं.उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को जबाबदेह बनाने और और त्वरित कार्य संपादन हेतु लम्बे समय से एक सीट पर जमे कर्मचारी बंधुओं को एक-दूसरे की जगह स्थानांतरित किया है,परीक्षा प्रणाली को जबाबदेह और पारदर्शी बनाया है ,परीक्षा   की गोपनीयता  भंग  करने वालों  को दण्डित  किया गया.परीक्षा प्रश्नपत्र का नया पैटर्न लागू किया गया ,बी- कापी पद्धति को खत्म कर दिया गया,कई  मदों में कटौती ,समय -समय पर अर्थदंड से प्राप्त धनराशि  और वित्तीय अनुशासन के साथ मितब्ययता कर विश्वविद्यालय नें इस वर्ष अब तक करीब एक करोड़ रूपये बचाए है  .यह सब आप सब की उपलब्धियां है .उन्होंने कहा कि नई सूचना तकनीक को अपना कर हम जहाँ   अपना कार्य त्वरित निपटा  सकते हैं वहीं  हम नई पीढी  से जुड़  भी सकते है. आज कम्यूटर  से दूरी  का मतलब  है हम अपनें  बच्चों  से ही  दूरी बना  रहे हैं.उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हम सभी को जन सेवा-समाज सेवा के लिए सतत तैयार रहना चाहिए ताकि इस विश्वविद्यालय का नाम समाज में -लोंगों की जुबान पर सम्मान के साथ लिया जाय.
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रोफ़ेसर डी.डी .दुबे नें कहा कि हमें आज प्रगति के लिए सकारात्मक सोच अपनाने की जरूरत है .उन्होंने इस आम सभा के जरिये संवाद स्थापित करने के लिए कुलपति जी की की भूरि-भूरि प्रशंसा की .
कुलसचिव डॉ बी .एल .आर्य नें सभी कर्मचारी बंधुओं से  आग्रह किया कि समय के साथ चलनें के लिए हम सभी को  सूचना प्रौद्योगिकी से युक्त होना होगा.कम्यूटर-इंटरनेट की उपयोगिता को समझाते हुए आपनें कहा कि हमें इस तकनीक को अपना मित्र बनाना होगा जिससे हम विश्वविद्यालय को प्रगति पथ त्वरित गति से ले जा संकें.
इस आम सभा का सञ्चालन कुलपती जी के निजी सचिव डॉ के .एस .तोमर द्वारा किया गया.इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त  सम्मानित अध्यापक बंधु ,सम्मानित अधिकारीगण और सम्मानित कर्मचारी बंधु उपस्थित थे.       


Sunday, 2 October 2011

रंगारंग के बीच रजत जयंती समारोह का आगाज़


पूर्वांचल विश्वविद्यालय का रजत जयंती समारोह आज  से रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ शुरू हो गया । आज उद्घाटन सत्र  की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. सुंदरलाल जी  ने कहा कि आज का दिन शिक्षक, कर्मचारी और छात्रों के लिए बड़े गौरव का है। एक वर्ष तक किसी न किसी रूप में हम  रजत जयंती समारोह मनाते रहेंगे। विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम से छात्रों को काफी कुछ सीखने का का मौका मिलेगा। इस दौरान विविध कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। बापू बाजार के माध्यम से सभी को समानता की ओर  ले जाने का प्रयास चल रहा है। जब तक शिक्षण संस्थान समाज से नजदीकी रूप से नहीं जुड़ेंगे तब तक उद्देश्य अधूरा रहेगा। हमने बापू बाजार के जरिए विश्वविद्यालय को सीधे समाज से जोड़ने का प्रयास किया है। गुणवत्ता युक्त शिक्षा के जरिए विश्वविद्यालय को नई ऊंचाई दी जायेगी । 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व न्यायाधीश ए.बी. श्रीवास्तव ने कहा कि हम सभी को मिलकर ऐसा काम करना है जिससे विश्वविद्यालय निरंतर तरक्की करे। विश्वविद्यालय सिर्फ युवकों को डिग्री बांटने का काम न करें, बल्कि उन्हें अच्छे इंसान के रूप में तैयार करें। शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक उन्नयन की दिशा में गंभीर प्रयास होने चाहिए। विश्वविद्यालय की गरिमा बेहतर पठन पाठन से बढ़ेगी।

उत्तर-प्रदेश सरकार के  पूर्व मंत्री ओ.पी. श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय आज शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। इसकी साख को और चार चांद लगाने की जरूरत है।उन्होंने विश्वविद्यालयों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त रखने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि किसी के अधीन न रहने पर विश्वविद्यालयों में बेहतर तरीके से काम काज हो सकता है। 
चिंतक शिव स्वारथ सिंह ने कहा कि गांधी जी के विचारों की उपयोगिता आज और अधिक बढ़ गई है। उनके आंदोलन की झलक जय प्रकाश नारायण व अन्ना हजारे के संघर्ष में दिखी है।    
 कुलसचिव डा. बीएल आर्य  जी ने विश्वविद्यालय की प्रगति पर विस्तार से प्रकाश डाला।रजत जयंती समारोह में ही अंतरविश्वविद्यालयीय युवा महोत्सव के लिए छात्रों का चयन किया गया।चयनित छात्र महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी में 15 से शुरू हो रहे युवा महोत्सव में हिस्सा लेंगे। युवा महोत्सव के संयोजक  डा. अविनाश पार्थिडकर ने बताया कि युवा महोत्सव के लिए विश्वविद्यालय टीम का चयन किया गया है। सुगम संगीत के लिए सुबोध कुमार का चयन किया गया। समूह गान केलिए दीपक यादव व अन्य, डिवेट केलिए नितिन कुशवाहा, काव्य पाठ के लिए प्रतीक शुक्ल, फाइन आर्ट केलिए प्रतीक्षा सिंह, कोलाज के लिए जंग बहादुर शुक्ल, पोस्टर मेकिंग के लिए विनोद कुमार, रंगोली के लिए ऋचा पाल का चयन किया गया है ।रजत जयंती समारोह के मद्देनजर संगोष्ठी भवन को बड़े ही आकर्षक ढंग से सजाया गया था । समारोह के  पूर्व में  मुख्य अतिथि और अन्य सम्मानित अथितियों द्वारा  माँ  सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया गया. इस  अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक गण, प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारीगण उपस्थित थे. संचालन डा.पंकज सिंह व आभार ज्ञापन डा.अविनाश पार्थिडकर ने किया।

  





Saturday, 1 October 2011

वीर बहादुर सिंह पूर्वान्चल विश्वविद्यालय के बढ़ते कदम - - डॉ के .एस. तोमर


वक्त मनुष्य का खामोश पहरूआ है। वह न स्वयं रूकता है और न किसी को रोकता है। वह खबरदार करता है और दिखाई नहीं देता। वह चलता जा रहा है। सूर्य उदय होता है और ढल जाता है। केलेण्डर बदल जाता है और हम सभी का प्रत्येक पल इतिहास होता जा रहा है। हर साल नया वर्ष आता है और बीत जाता है। इस वर्ष भी नया वर्ष आया, हमने इस केलेण्डर की जगह नया केलेण्डर लगा दिया। विश्वविद्यालय के इतिहास में भी 24 केलेण्डर बदल गये। पूर्वान्चल विश्वविद्यालय की स्थापना 2 अक्टूबर, 1987 को हुई और देखते ही देखते 24 वर्ष बीत गये। विश्वविद्यालय 2 अक्टूबर, 2011 को रजत जयन्ती वर्ष में प्रवेश कर रहे है तथा अपने इस विश्वविद्यालय का 25वाॅं स्थापना दिवस भी मनाने जा रहे है।
विश्वविद्यालय के विगत 24 वर्ष के इतिहास मंे झांके तो हमंे सूक्ष्म रूप से ही सही जौनपुर के इतिहास की ओर भी देखना पड़ेगा। आदि गंगा पावन सलिला गोमती के सुरम्य तट पर बसा नगर, जौनपुर अपनी ऐतिहासिकता के लिए प्रसिद्ध है। जौनपुर को ‘‘शिराजे-ए-हिन्द’’ बनने का भी सौभाग्य प्राप्त है आध्यात्म, शिक्षा एवं सांस्कृतिक दृष्टि से प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध नगर जौनपुर को छोटी काशी की उपमा दी जाती रही है क्योंकि काशी के बाद जौनपुर ही संस्कृत भाषा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है। इसी गौरवशाली पृष्ठभूमि को बनाए रखने के लिए पूर्वान्चल के प्रबुद्ध वर्ग विशेषकर जौनपुर के नेतृत्व ने यहाॅं पर विश्वविद्यालय की स्थापना का बीड़ा उठाया। गौतम बुद्ध ने कहा ‘अपना प्रकाश दीप स्वंय बनो’। कुरआन कहता है ‘अंधकार से रोशनी की ओर चलो’। हजरत ईसा का कहना है ‘अपने आपका दीपक बनो’। वेदमंत्र है ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ यानि अधंकार से प्रकाश की ओर चलो। इन पावन वाक्यों में एक ही संदेश हुआ है ‘ज्ञान के माध्यम से मनुष्य का सर्वांगीण विकास’ इसी उद्देश्य को लेकर पूर्वान्चल विश्वविद्यालय की स्थापना का संकल्प पूरा हुआ। जौनपुर मंे विश्वविद्यालय की स्थापना निश्चित रूप से ‘‘शिराजे-ए-हिन्द’’ की धरती का सम्मान था।
इतिहास के पन्ने उलटे तो सामने आता है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही पूर्वान्चल विश्वविद्यालय को गोरखपुर विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र का एक बड़ा भाग स्थानान्तरित कर दिया गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, बलिया, वाराणसी, मिर्जापुर, इलाहाबाद तथा सोनभद्र कुल 9 जनपदों के 68 स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालय इससे सम्बद्ध कर दिये गये। अतः अपने जन्म से ही यह विश्वविद्यालय कार्यक्षेत्र सम्बद्ध महाविद्यालयों तथा छात्रों की संख्या की दृष्टि से बड़ा विश्वविद्यालय था। अपना भवन न होने के कारण विश्वविद्यालय का कार्यलय प्रथमतः टी0डी0 कालेज, जौनपुर के फार्म हाऊस के पुराने भवन (पीली-कोठी) में प्रारम्भ हुआ। उस समय न तो बैठने के लिए कुर्सी थी और न ही कार्य करने के लिए मेज थी। टी0डी0कालेज से कुछ कुर्सी मेज उधार लेकर कार्य प्रारम्भ हुआ। कार्य को गति देने तथा विश्वविद्यालय को स्वरूप प्रदान करने के लिए स्टाफ, भूमि और भवन नहीं थे। उत्तर प्रदेश शासन ने विश्वविद्यालय हेतु भूमि अधिग्रहित करने के लिए कुल 85 लाख की धनराशि भी स्वीकृत की तथा कुछ पद भी स्वीकृत किये। शासन द्वारा सृजित पदों पर नियुक्तियाॅं हुई, तत्पश्चात विश्वविद्यालय की विकास यात्रा प्रारम्भ हुई। जिला प्रशासन ने जौनपुर शहर से लगभग 12 कि0मी0 दूर जौनपुर शाहगंज मार्ग पर देवकली जासोपुर ग्राम सभाओं की कुल 171.5 एकड़ भूमि अधिग्रहीत कर विश्वविद्यालय को उपलब्ध करायी।
इसी बीच विश्वविद्यालय ने अपने प्रशासनिक एवं शैक्षिक कार्यो को गति प्रदान करने तथा अपना कार्य समुचित एवं नियमानुसार निपटाने हेतु, अपनी कार्यपरिषद, विद्वत परिषद, परीक्षा समिति, प्रवेश समिति, क्रीड़ा परिषद, वित्त समिति आदि समितियों का गठन किया और अपनी प्रथम परिनियमावली का निर्माण कर शासन के अनुमोदनार्थ भेजा। इसी के साथ ही विश्वविद्यालय ने अपना अध्यादेश भी निर्मित किया।
24 वर्ष पूर्व स्थापित पूर्वान्चल विश्वविद्यालय आज वयस्क रूप में समाज के सामने प्रतिस्थापित हो चुका है। सौभाग्य से विश्वविद्यालय को कर्मठ एवं दूरदर्शी कुलपतियों का नेतृत्व प्राप्त होता रहा है। प्रथम कुलपति श्री हरिमूर्ति सिंह जी ने विश्वविद्यालय की कार्यशैली की आधार शिला रखी तो स्व0 डा0 आर0 एन0 गुप्ता जी ने प्रशासनिक ढाॅंचे का रूप दिया। सभी ने इसके विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रो0 यू0 पी0 सिंह के कार्यकाल में विश्वविद्यालय के अपने स्वयं के घर का सपना साकार हुआ। स्व0 प्रो0 शरत कुमार सिंह जी ने विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग पठन-पाठन शुरू कराया वहीं परिसर पाठ्यक्रम की शुरूआत का श्रेय डा0 पातंजलि जी को जाता है तो भवनों की श्रंृखला प्रारम्भ कराने का श्रेय प्रो0 नरेश चन्द्र गौतम जी की है। प्रो0 के0 पी0 सिंह जी ने प्रशासनिक दृढ़ता का परिचय दिया तो डा0 सारस्वत जी ने इस प्रवृत्ति को स्थिरता प्रदान की। वर्तमान कुलपति भी इन यशस्वी कुलपतियों की परम्परा में अपना योगदान देने हेतु प्रयासरत् है। आज विश्वविद्यालय परिसर में स्नातक स्तर पर इंजीनियरिंग की छः शाखाओं में शिक्षा दी जा रही है। साथ ही बी0फार्मा, एम0बी0ए0, एम0सी0ए0, एम0बी0ई0, एम0एफ0सी0, एम0एच0आर0डी0, मास कम्युनिकेशन एण्ड जर्नलिज्म, एप्लाइड साइकोलाजी, एम0एस-सी0 बायोटेक्नोलाजी, इन्वायरमेन्टल साइंस, अप्लाइड माइक्रोबायोलाजी, अप्लाइड बायोकेमेस्ट्री, एग्री बिजनेस तथा ई0कामर्स जैसे अनेक व्यवसायिक स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में संचालित हो रहे है। इन विभागों में लगभग 2500 छात्र-छात्रायें शिक्षा ग्रहण कर रहे है और लगभग सभी शिक्षार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है। विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासनिक भवन, छात्र सुविधा केन्द्र, संगोष्ठी भवन, शिक्षक अतिथि गृह, एन0 एस0 एस0 भवन, केन्द्रीय पुस्तकालय, संकाय भवन, आई0बी0एम0 भवन, चरक भवन, उमानाथ सिंह प्रौद्योगिक संस्थान, केन्द्रीय मूल्यांकन, अतिथि गृह, ट्रांजिट हास्टल, विश्वकर्मा छात्रावास, यू0जी0 छात्रावास, पी0जी0छात्रावास, एवं महिला छात्रावास भवन पूर्ण रूप से निर्मित हो चुके है तथा आवासीय परिसर में भी लगभग 250 फ्लैटस निर्मित हो चुके हैं जिसमें अधिकारी, शिक्षक एवं कर्मचारी रह रहे है। विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर चुके छात्र-छात्रायें अनेक जगहों पर शीर्षस्थ स्थानों पर पहुॅंचे हैं। क्रीडा के क्षेत्र में यहाॅं के छात्रों द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदको सहित अनेकों पदक प्राप्त किये है। वहीं अनेकों छात्र राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न सेवाओं में स्थापित होकर राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय के गौरव को बढ़ा रहे है।
विश्वविद्यालय का उद्देश्य अपने छात्रों को सक्षम एवं सच्ची उच्च शिक्षा के माध्यम से उसका चहुमुखी विकास करना होता है। इस सक्षम, सच्ची उच्च शिक्षा से ही देश की युवा पीढ़ी को ज्ञानवान एवं संस्कारित बनाया जा सकता है समाज की सम्पूर्ण आशाओं, आकांक्षों का केन्द्र वहाॅं की युवा शक्ति ही होती है। यदि यह शक्ति किन्ही कारणोवश दिग्भ्रमित होकर पथभ्रष्ट हो जाये तो वह समाज एवं राष्ट्र पतोन्मुख हो जायेगा। समाज एवं राष्ट्र की प्रगति के लिए आवश्यक है कि इस शक्ति का समुचित रूप से उपयोग किया जाय और उसे रचनात्मक कार्यों में लगाया जाय। छात्र ही युवाशक्ति के प्रतीक है। विशेषकर उच्च शिक्षा से सम्बद्ध छात्रों को दिशा देना नितांत आवश्यक है क्योंकि विद्यार्थी ही राष्ट्र का भावी नेता और शासक है। देश की उन्नति और भावी विकास का सम्पूर्ण दायित्व उसके सबध कंधों पर आने वाला है। सचमुच में राष्ट्र की उन्नति एवं प्रगति के लिए वह मुख्य धुरी का काम कर सकता है। जिस देश का विद्यार्थी सतत् जागरूक, सतर्क और सावधान होता है वह देश प्रगति की दौड़ में पीछे नहीं रह सकता। विद्यार्थी के जीवन में सत्य की सुगन्ध, तारूण्य का त्याग और उत्सर्ग के उमंग होनी चाहिए। ऐसे ही विद्यार्थी देश के गौरव, राष्ट्र की आकांक्षा और उन्नति का आधार बन सकते है। सतत् परिश्रमी, स्वस्थ, सबल, स्वावलम्बी और महत्वाकांक्षी विद्यार्थी ही राष्ट्र की शक्ति और अतुल सम्पत्ति है। राष्ट्र निर्माण और उसके प्रति सच्ची समपर्ण भावना रखने वाला विद्यार्थी ही सच्चा देशभक्त और सेवक हो सकता है। राष्ट्र निर्माण के लिए आज मैं छात्रों का, राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त की इन पंक्तियों के माध्यम से आह्वान करता हूॅॅं।
रखते हो तो दिखाओ कुछ आभा, उगते तारे।
आओ तेज, साहस के दुलर्भ दिन हैं यही हमारे।।
एक-एक, सौ-सौ अन्यायी कंसों को ललकारो।
अपनी पुण्य भूमि पर धन-जीवन सब वारो।।
आज जाति और धर्म हमारी राजनीति की झुठलाती गयी सच्चाई बन गये हैं जो वर्तमान सन्दर्भ में परिभाषित होकर नये सिरे से मान्यता की माॅंग कर रहे है। आज नितान्त जरूरत हैं राष्ट्रीय चरित्र निर्माण और नैतिक उत्थान की। नैतिक और मानवीय मूल्यों की प्रतिस्थापना की और यह बीड़ा युवा शक्ति को उठाना होगा। यदि आज का युवा दिग्भ्रमित होगा तो देश मानवीय और नैतिक अवमूल्यन की ओर जायेगा। आज प्रतिशत में देखा जाय तो युवा पीढ़ी दिशाहीन है। छात्र दिशाहीन हैं वे उन फाइलों के फीते हैं जिनके कागज शुरू से गायब है। अब जरूरत है सुधार इकाई से शुरू हो। हमारे सामने सबसे छोटी इकाई है व्यक्ति और वृहत्तर इकाई है विश्व। दोनों का गहरा अन्तर सम्बन्ध है। जुड़े हुए है। व्यक्ति से भिन्न विश्व नहीं और विश्व से भिन्न व्यक्ति नहीं। जरूरत है व्यक्ति के सुधरने की। सुधरे व्यक्ति, समाज व्यक्ति से तो राष्ट्र स्वयं सुधरेगा और तभी देश में राष्ट्रीय मूल्य स्थापित हो सकेंगे राष्ट्र सक्षम होगा।
संसार को प्रकाशित करने के लिए हमको जलना होगा हमको तपना होगा। तभी हम सफल होंगे। सफल युवा कोई महान काम न भी करे तो कोई बात नहीं परन्तु उन्हें छोटे कामों को भी महान ढंग से करना सीखना होगा। इंतजार करने वालों को चीजे मिलती तो है, लेकिन सिर्फ वही मिलती है, जो संघर्ष करने वाले छोड़ देते हैं। सफलता किस्मत का नहीं बल्कि उसूलों और कृत्यों का नाम है। सफलता का मतलब सिर्फ असफल होना नहीं है बल्कि सफलता का सही अर्थ है अपने मकसद को पाना। इसका मतलब है पूरा जीवन सफल बनाना न कि जीवन के किसी एक पक्ष को सफल बनाना। पूर्वान्चल विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों, इससे जुड़े समस्त जनमानस के चहुमुखी विकास के लिए दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है।
आइये वो धूप के छप्पर हों या छांव की दीवारें
अब जो भी उठायेंगे मिल जुल के उठायेंगे
जब साथ न दे कोई आवाज हमंे देना हम फूल सही,
लेकिन पत्थर भी उठायेंगे।
इसी अवधारणा के वशीभूत होकर विश्वविद्यालय में विकास हेतु अनेकों कदम उठाये है- वर्ष 2011 की परीक्षा में शत-प्रतिशत (उत्तर पुस्तिकाओं) कोडिंग कराकर मूल्यांकन कराया गया। विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहली बार हुआ है सम्भवतः प्रदेश में भी पहली बार। समय पर परीक्षा फार्म जमा न कराने पर इस वर्ष 88 महाविद्यालयों के 34,921 छात्रों को मुख्य परीक्षा से वंचित किया गया। माननीय न्यायालय के आदेश पर ही पुनः परीक्षा करायी गयी। परीक्षाफार्म, समय से जमा न करने वाले महाविद्यालयों/प्रबन्धकों पर अर्थदण्ड लगाया गया। विलम्ब शुल्क एवं अर्थ दण्ड के रूप में अनुशासनहीनता के लिए महाविद्यालयों से रूपया 52,69,400/- (रूपया बावन लाख उन्नहतर हजार चार सौ)  वसूला गया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार (10 मार्च से 14 मई 2011) परीक्षा आयोजित की गयी तथा समय से मूल्यांकन कार्य सम्पन्न हुआ (05जून, 2011)। मूल्यांकन पश्चात् अंकपर्ण तैयार करने की नवीन व्यवस्था लागू की गई और समय से परीक्षा परिणाम घोषित कर दिये गये है। 93,541 छात्रों की पर्यावरण/राष्ट्र गौरव की परीक्षा वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के माध्यम से कराई गयी जिससे विश्वविद्यालय को लगभग 10 लाख रूपयों की बचत हुई। लगातार तीन वर्षो से मूल्यांकन में लगे कर्मियों को इस वर्ष मूल्यांकन कार्य से हटाया गया। शिक्षकों द्वारा असावधानी पूर्वक किये गये मूल्यांकन के कारण माननीय न्यायालयों द्वारा विश्वविद्यालय पर लगाये अर्थदण्ड को संबंधित शिक्षकों से वसूला गया। असावधानी पूर्वक किये मूल्यांकन के आरोपित (06) शिक्षकों का परीक्षत्व निरस्त किया गया तथा उन्हंे आगामी परीक्षा कार्यो से विरत किया गया।
शोध मूल्यांकन में पारदर्शिता हेतु शोधपत्र की बाध्यता एवं शोध प्रबन्ध मौखिकी परीक्षा की वीडियोग्राफी जैसे कदम उठाये गये है तथा शोध ग्रन्थों को इन्फिलिब नेट पर उपलब्ध कराने एवं शोध ग्रंथो की नकल रोकने हेतु यू0जी0सी0 के शोध गंगा प्रोजेक्ट के साथ साझेदारी की जा रही है। विश्वविद्यालय में सभी विषयों (इंजीनियरिंग/ एग्रीकल्चर/उर्दू को छोड़कर) में सत्र 2011-12 से समान पाठ्यक्रम लागू कर दिया गया है। प्रत्येक विषय की तीन सर्वाधिक अंकों वाली उत्तर पुस्तिकाओं का सार्वजनिक अवलोकनार्थ विश्वविद्यालय के केन्द्रीय पुस्तकालय में उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि और छात्र भी इससे प्रेरित हो सकें। कक्षा संचालन की अनुमति देने के पूर्व सम्बद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं महाविद्यालय के अभिलेखों का विश्वविद्यालय बुलाकर भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। 8फरवरी 2011 को चतुर्दश दीक्षान्त समारोह का आयोजन किया गया। 21 जनवरी, 2012 को पन्द्रहवाॅं दीक्षान्त समारोह का आयोजन किया जायेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में मिले 10.50 करोड़ रूपये में से गत चार वर्षो में खर्च 1.80 करोड़ का प्रयुक्तिकरण किया गया तथा अतिरिक्त दो करोड़ रूपयों हेतु योजना एवं उसका व्यय किया गया। परिनियमावली में वर्णित छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष एवं चार सहायक संकायाध्यक्षों की नियुक्ति की गयी। परिसर परीक्षाओं के शीघ्र परिणाम हेतु टेक्निकल सेल का गठन किया गया। दो शिक्षकों को विदेश एवं 06 शिक्षकों को देश में कान्फ्रेन्स मंे भाग लेने हेतु आर्थिक/शैक्षणिक सुविधा प्रदान की गयी। दो शिक्षकांे को अनुसंधान हेतु सवेतन अवकाश प्रदान किया गया। विज्ञान दिवस के अवसर पर दो दिन (28.02.2011, 01.03.2011) के विविध कार्यक्रम आयोजित किये गये। एथिकल हैंकिग विषय पर इंजिनियरिंग संस्थान मंे 9 एवं 10 अपै्रल को दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी। इंजीनियर्स डे पर दो दिवसीय आयोजन दिनांक 14 एवं 15 सितम्बर, 2011 को सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। विभिन्न विषयों में 20 से अधिक विद्वानों को निमन्त्रित कर उनका व्याख्यान विश्वविद्यालय में कराया गया। बायो टेक्नोलाजी विभाग द्वारा सैंटर फार एक्सैलेंस (राज्य सरकार) एस0ए0पी0 (यू0जी0सी0) तथा एफ0आई0एस0टी0 (डी0एस0टी0) हेतु योजनायें प्रस्तुत की गयी। सभी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विभागों में इण्टरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई गयी। इस वर्ष प्रश्न पत्र प्रिटिंग पर लगभग 20 लाख रूपये की बचत की गयी। कोडिंग पर लगभग 10 लाख रूपये की बचत की गयी। वस्तुनिष्ठ परीक्षा कराकर लगभग 10 लाख रूपये की बचत की गयी। सामान्य प्रिंटिग पर लगभग 05 लाख रूपये की बचत की गयी। चार वर्ष से अधिक एक ही विभाग में कार्यरत् 215 कर्मियों का विभाग परिवर्तन किया गया। अवकाश एवं परीक्षा अवधि मंे कटौती कर शिक्षण दिवसों की संख्या में वृद्धि की गयी। छात्र कल्याण विभाग के अन्तर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति/अल्पसंख्यक सैल की स्थापना की गयी। विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों को समाज से जोड़ने एवं छात्रों में नेतृत्व गुण विकसित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सेवा योजना के अन्तर्गत मासिक ‘बापू बाजार’ की श्रृखंला शुरू की गयी। इस श्रृखंला में अब तक 5 बापू बाजारों का आयोजन (दिनांक 30 जनवरी 2011 जासोपुर, जौनपुर, 27 फरवरी 2011 को दुल्लहपुर, गाजीपुर, 31 जुलाई 2011 को मुहम्मदाबाद गोहना, मऊ, दिनांक 28 अगस्त 2011 को बैजावारी, आजमगढ़ तथा 25 सितम्बर 2011 को खुटहन, जौनपुर) सम्पन्न किया जा चुका है। यह श्रृखंला आगे भी (परीक्षाकाल, ग्रीष्मावकाश छोड़कर) अनवरत जारी रहेगी। 22फरवरी - 25 फरवरी, 2011 में रोवर्स रेंजर्स रैली का आयोजन, छूटी हुई परीक्षायें एक दिन में दो पालियों के बजाय तीन पालियों में सम्पादित कराना तथा भविष्य में समस्त परीक्षाएॅं तीन पालीयों में कराने का निर्णय लिया गया। स्नातक स्तर पर लगभग 10 रोजगार परक नये पाठ्यक्रमों को तैयार करने की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में, आगामी सत्र से लागू करने की योजना, परीक्षा/मूल्यांकन में पारदर्शिता लाने हेतु कदम, समस्त फार्मो का आन लाइन करना, कम्प्यूटराइज्ड डाटा वेस का निर्माण, नैक द्वारा अवलोकन हेतु प्रयास, यू0जी0सी0 टीम द्वारा अवलोकन कराना, रजत जयन्ती वर्ष के विशेष शैक्षणिक/सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन, विश्वविद्यालय कर्मियों हेतु इनसर्विस कम्प्यूटर टेªनिंग कार्यक्रम चला कर प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार लाना, कम्युनिटि रेडियो की स्थापना का प्रस्ताव, हमारी प्राथमिकतायें है। यू0जी0सी0 में भेजे जाने हेतु तैयार प्रस्ताव- गांधी अध्ययन केन्द्र, महिला विकास केन्द्र, अनुसूचित जाति/जनजाति तथा अल्पसंख्यक छात्रांे हेतु कोचिंग सैंटर। कैरियर काउन्सलिंग एवं प्लेसमंेट सैल। सत्र 2011-2012 हेतु भारतीय विश्वविद्यालय संघ द्वारा प्रदत्त विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन - पूर्वी क्षेत्र अन्तर्विश्वविद्यालयीय क्रिकेट महिला प्रतियोगिता। पूर्वी क्षेत्र अन्तर्विश्वविद्यालयीय बास्केटबाल महिला प्रतियोगिता। पूर्वी क्षेत्र अन्तर्विश्वविद्यालयीय हाकी महिला प्रतियोगिता। अखिल भारतीय अन्तर्विश्वविद्यालयीय ;(
All India Inter University) हाकी महिला प्रतियोगिता आदि आयोजनों के लिए विश्वविद्यालय तैयार है।
हम सभी ने अपने संस्थापकों के सपनों से प्रेरणा ली है, जनपद की आकाॅंक्षाओं से ऊर्जा प्राप्त की है तथा युवाओं को सुनहरे भविष्य में झांकने की भावना ने दृढ़ता प्रदान की है। हमें विश्वास है जले हुए दिये की कालिख गवाह होगी कि पुनः युग बदलेगा, शिक्षा बदलेगी और भारत फिर विश्व का ज्ञानगुरू कहलायेगा - तथा भारत के ज्ञान और यहाॅं की संस्कृति को सारा विश्व अपनायेगा।
आॅंच दे संवेदनाओं को पिघलने के लिए,
बदचलन होती हवा का रूख बदलने के लिए।
हमने एक शम्मा जलाई है बड़े विश्वास से,
इन अंधेरों के इरादों को कुचलने के लिए।।

विश्वविद्यालय की स्थापना का विवरण प्रस्तुत है -
पूर्व मुख्यमंत्री स्व0 श्री वीर बहादुर सिंह के मन में, अपने पूर्वजांे की कर्मभूमि की भावुकता तथा जौनपुर के बुद्धिजीवियों के लगातार तकाजों के चलते यह अवधारणा निश्चय ही मजबूत हुयी होगी कि विश्वविद्यालय जौनपुर मंे ही बने। अतः जौनपुर को विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए चुन लिया गया। निश्चय ही यह इस जनपद के लिए सुखद और शिराज-ए-हिन्द की धरती का सम्मान था। प्रकाशित नोटिफिकेशन इस प्रकार है -

क्रम संख्या - 1387
(रजिस्टर्ड नं0 ए0 डी0 - 4
लाइसेन्स सं0 डब्ल्यू0 पी0-4)
(लाइसेन्स टू पोस्ट विदाउट प्रीपेमेन्ट)


सरकारी गजट, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेशीय सरकार द्वारा प्रकाशित
असाधारण
लखनऊ, सोमवार, 28 सितम्बर, 1987
आश्विन 6, 1909 शक सम्वत्
उत्तर प्रदेश सरकार
शिक्षा अनुभाग - 10
संख्या 5005, 15 10-87-15 (15) - 86 टी0सी0
लखनऊ, 28 सितम्बर, 1987
अधिसूचना
उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय (पुनः अधिनियम तथा संशोधन) अधिनियम, 1974 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 29 सन् 1974) द्वारा यथा पुन अधिनियमित और संशोधित, उत्तर राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 (राष्ट्रपति अधिनियम संख्या 10 सन् 1973) की जिसे आगे उक्त अधिनियम कहा गया है धारा 1 की उप-धारा (1-क) के अधीन शक्ति का प्रयोग करके राज्यपाल दिनांक 2 अक्टूबर, 1987 को ऐसा दिनांक नियत करते हैं जब से उक्त अधिनियम की अनुसूची में विनिर्दिष्ट सम्बद्ध क्षेत्रों के लिए जौनपुर में पूर्वान्चल विश्वविद्यालय के नाम से एक विश्वविद्यालय की स्थापना की जायेगी।
2- उक्त अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (6) के अधीन शक्तियों और इस निमित्त अन्य समस्त समर्थकारी शक्तियों का प्रयोग करके राज्यपाल यह भी निर्देश देते हैं कि उक्त विश्वविद्यालय की अधिकारिता के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रों में स्थित किसी भी महाविद्यालय के प्रत्येक छात्र को, जो इस विश्वविद्यालय की स्थापना के ठीक पूर्व गोरखपुर विश्वविद्यालय की उपाधि के लिए अध्ययन कर रहा था या उसके लिए परीक्षा में बैठने के लिए पात्र था, उक्त उपाधि के लिए अपना पाठ्यक्रम पूरा करने की अनुज्ञा दी जायेगी और ऐसे छात्र के शिक्षण और उसकी परीक्षा के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा आवश्यक प्रबन्ध किया जायेगा जो ऐसी परीक्षा का फल घोषित करेगा और तदुपरान्त पूर्वांचल विश्वविद्यालय ऐसी घोषणा के आधार पर अपनी उपाधि प्रदान करने के लिए सक्षम होगा।
    आज्ञा से
जगदीश चन्द्र पन्त
    प्रमुख सचिव

Monday, 19 September 2011

इण्डोर स्टेडियम:सर्वांगीण शिक्षा के क्षेत्र में एक और पहल


 पूर्वांचल विश्वविद्यालय इंडोर स्टेडियम का शिलान्यास करते विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.सुंदर लाल जी,शिक्षा मंत्री डा. राकेशधर त्रिपाठी और रेशम वस्त्रोद्योग मंत्री जगदीश नारायण राय।

आज सर्वांगीण शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय नें एक और पहल कर ,अपनें  विद्यार्थियों के लिए बेहतर सुविधा से सुसज्जित इण्डोर स्टेडियम की आधारशिला रख दी.
उच्च शिक्षा मंत्री डा0 राकेशधर त्रिपाठी नें   पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 5.77 करोड़ रू0 से बनने वाला इण्डोर स्टेडियम का आज शिलान्यास किया। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम होगी। बैडमिन्टन  ,कुश्ती, जिम्नास्टिक,जूडो  -कराटे आदि खेलों के आयोजन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन लम्बे अरसे से इण्डोर स्टेडियम की जरूरत महसूस कर रहा था .स्टेडियम के निर्माण पर आने वाली लागत का 35 प्रतिशत हिस्सा शासन दे रहा है जबकि 65 प्रतिशत खर्च विश्वविद्यालय स्वयं करेगा ।  परियोजना प्रबन्धक उ0प्र0 राजकीय निर्माण निगम द्वारा बताया गया  कि एक वर्ष के अन्दर इस इण्डोर स्टेडियम का निर्माण कार्य पूर्ण हो जायेगा।
                                                                       



कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के   कुलपति प्रो0 सुन्दरलाल ने विश्वविद्यालय के प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी दी और कहा कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय खेल-कूद की उन्नति के लिए सदैव तत्पर है ,इसी का परिणाम रहा है कि आज इस विश्वविद्यालय के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर इस विश्वविद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं . 

 उच्च शिक्षा मंत्री डॉ राकेश धर त्रिपाठी नें  अपने सम्बोधन में कहा कि शिक्षा का समुचित विकास प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। संगोष्ठी भवन में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिनाई उन्होंने कहा कि राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय को इस वर्ष खेलकूद आयोजन के लिए नोडल विश्वविद्यालय नामित किया गया है।यह हमारा संकल्प है कि नये भवन, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने व खेलकूद में किसी प्रकार से  धन की कमी नहीं आने पायेगी। उच्च शिक्षा मंत्री  ने कार्यक्रम के दौरान ही विश्वविद्यालय के  संगोष्ठी भवन को  वातानुकूलित बनाने, विद्युत उपकरणों की मरम्मत आदि के लिए दस लाख रुपये देने की घोषणा की .
 कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रेशम व वस्त्रोद्योग एवं व्यावसायिक शिक्षा मंत्री उ0प्र0 जगदीश नारायण राय ने मा0 उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा स्टेडियम के लिए धन अवमुक्त करने के लिए बधाई दी तथा उम्मीद जताई की शासन  की ओर  से उच्च  शिक्षा के विकास के लिए इस विश्वविद्यालय को आवश्यकता पड़नें  पर  और भी धन उपलब्ध कराया जाएगा.
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ बी.एल .आर्य द्वारा  आये हुए समस्त अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया   गया. कार्यक्रम का संचालन अशोक कुमार सिंह ने किया। 
इस  अवसर पर विशेष शिक्षा सचिव ए0के0सिंह, क्षेत्रीय शिक्षा निदेशक वाराणसी आलोक चन्द पाण्डेय, उच्च शिक्षा सलाहकार चन्द्र विजय चतुर्वेदी, उच्च शिक्षा निदेशक रामानन्द प्रसाद, 
परीक्षा नियंत्रक आरएस यादव, वित्त अधिकारी अतुल कुमार श्रीवास्तव, टीडी कालेज के प्राचार्य डॉ यूपी सिंह, मड़ियाहूं कालेज के प्राचार्य डा. लालजी त्रिपाठी, राज कालेज के प्राचार्य डॉ एसपी ओझा,  खेलकूद परिषद के अध्यक्ष वीरेंद्र नाथ सिंह, सचिव देवेंद्र कुमार यादव,    एनएसएस समन्वयक डा. हितेंद्र प्रताप सिंह, कुलपति के निजी सचिव डा. केएस तोमर सहित भारी संख्या में शिक्षक और छात्र  उपस्थित रहे।                           











Monday, 5 September 2011

शिक्षक अपनें तप बल से विद्यार्थियों को प्रेरणा दें ....

विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में  शिक्षक दिवस  समारोह के  मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों और शिक्षकों को   संबोधित   करते हुए आदरणीय कुलपति जी नें कहा कि आज समय की पुकार है कि शिक्षक अपनें तप बल  से विद्यार्थियों  को प्रेरणा  दें,ताकि विद्यार्थी उनका अनुसरण कर अपनी मंजिल पा सकें .गुरु -शिष्य परम्परा कलंकित न हो इसके लिए गुरुजनों को सक्रिय होना होगा .उन्होंने कहा  कि  जहाँ एक ओर विद्यार्थी    ज्ञान प्राप्ति के लिए संकुचित दृष्टिकोण अपना रहे हैं वहीं गुरुजन भी विद्यार्थियों के साथ उस तरह नहीं जुड़ पा  रहे  जैसे वे पहले जुड़ते थे.शिक्षक का  मतलब केवल किताबी ज्ञान देना भर नहीं है अपितु  उसे विद्यार्थियों  के चतुर्मुखी विकास के लिए सोचना होगा.उन्हें  अपनें ज्ञान का स्तर इतना बढ़ाना होगा ताकि उसके पांडित्य का प्रभाव विद्यार्थियों पर निश्चित रूप से पड़ सके क्योंकि आज का विद्यार्थी भी अब सजग और जागरूक है..उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भी अपना ज्ञानचक्षु खुला  और भावनाओं को जिन्दा रखना होगा. आज इस पुनीत दिन हम सबको एक-दूसरे की बेहतरी और सम्मान के लिए संकल्पित होना होगा.
इस समारोह के साथ माननीय कुलपति जी द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय सेवा योजना की चार इकाइयों का भी शुभारम्भ किया गया. इस अवसर पर इंजीनियरिंग संकाय के डीन प्रो.बी.बी.तिवारी नें कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है,इस पावन दिवस पर परिसर में चार इकाइयों का गठन  अभूतपूर्व है.यह सब माननीय कुलपति जी की प्रेरणा से ही संभव हो सका है.अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.राम जी लाल नें कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के इस इकाई के गठन  का एकमात्र उद्देश्य जन सेवा है.उन्होंने कहा कि समाज सेवा से ही देश सेवा होती है .उन्होंने आशा व्यक्त की कि हमारे विद्यार्थी विश्वविद्यालय, जनपद और देश में जन सेवा का एक आदर्श प्रस्तुत करेंगे.विश्वविद्यालय के इतिहास में यह एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है. वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ हितेंद्र प्रताप सिंह नें विस्तार से इसके उद्देश्यों और आदर्शों की चर्चा की.उन्होंने कहा कि दूसरों के लिए सेवा भाव रखना ही राष्ट्रीय सेवा योजना का मुख्य उद्देश्य रहा है. इंजीनियरिंग संकाय के डॉ संतोष कुमार ,डॉ अमरेन्द्र कुमार सिंह ,श्री भूपेंद्र पाल और फार्मेसी संस्थान के श्री विनय कुमार को परिसर स्थित चारों इकाइयों  का स्थानीय   समन्वयक बनाया गया है.  पूर्व में सर्व पल्ली डॉ राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण और गुरुवन्दना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई. आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा और संचालन डॉ संतोष कुमार द्वारा किया गया.

इस अवसर पर डॉ अशोक कुमार श्रीवास्तव,डॉ मनोज मिश्र,श्री रजनीश भाष्कर,श्री रविप्रकाश,श्री गंगवार ,श्री एच .एन. यादव  सहित विश्वविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राएं मौजूद  रहे.

Saturday, 3 September 2011

स्व. डॉ क्षेम जी के प्रति

imageकल  दो सितम्बर को यशश्वी कवि और लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकार स्व.डॉ श्रीपाल सिंह क्षेम के जन्मदिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय नें अपनें कुलगीत के इस महान   रचनाकार  के प्रति सम्मान प्रदर्शित करते  हुए ,आदरणीय कुलपति जी की प्रेरणा से , उनके जन्मदिवस को संस्मरण दिवस के रूप में मनाया. इस अवसर पर जौनपुर साहित्य जगत से जुड़े विद्वान् साहित्यकारों नें जहाँ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई वहीं स्व.क्षेम जी से जुड़े अपनें संग्रहणीय संस्मरणों को ताज़ा भी किया.

imageइस संस्मरण दिवस पर तिलक धारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ बी.बी.सिंह,पूर्व प्राचार्य डॉ अरुण सिंह ,सल्तनत बहादुर पी.जी कालेज के पूर्व प्राचार्य और हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित समीक्षक डॉ लाल साहब सिंह,  ख्यातिलब्ध  साहित्यकार और विधिवेत्ता डॉ.पी .सी. विश्वकर्मा"प्रेम जौनपुरी",     प्रख्यात व्यंगकार श्री सभाजीत द्विवेदी "प्रखर",साहित्यकार एवं   कवि डॉ विनोद कुमार सिंह,श्री अरविन्द कुमार सिंह बेहोश,श्री देवेन्द्र वर्मा विमल तथा हाजी वकील अहमद अंसारी नें अपनें संस्मरण  एवं स्व.क्षेम की रचना से उनके संस्मरण दिवस पर अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की.
  imageजनसंचार विभाग की ओर से किये गये इस आयोजन में आये हुए साहित्यकारों और कविगण का स्वागत विभागाध्यक्ष डॉ अजय प्रताप सिंह द्वारा और आभार प्रदर्शन अधिष्ठाता छात्र कल्याण  प्रो.राम जी लाल  द्वारा  किया गया.
संस्मरण दिवस  पर आदरणीय कुलपति जी नें कहा कि -
हर व्यक्ति मन से कवि होता है वही भावनाएं होती हैं-वही विचार होता है.सामान्य जन भावना विचारों के भंवर में घूमता-झूमता रहता है,जीता मरता रहता है ,उसे शब्दों का टोटा होता है .साहित्यकार ,कवि उन भावनाओं-विचारों को नौका बना लेता है और शब्दों की पतवार से खेते हुए दूर-सूदूर तक जा पहुंचता  है,किनारे खड़े लोंगो को भिंगोता,सुखाता है . 
 
आदरणीय कुलपति  जी नें  अपनी रचना के जरिये स्व.डॉ क्षेम को कुछ इस तरह से श्रद्धा सुमन अर्पित किया----- 
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व्यक्त करूं मन की पीड़ा ,
या कहूं कही तन की अनुभूति ,
सुनू कहीं दंगल वैचारिक ,
सुघूं या जन मन की प्रीति ,
स्वर की नैया खेने को जब,
पतवार नहीं कहीं पाता हूँ ,
अक्षर,मात्राएँ खोजबीन ,
जब जोड़ गुणा बैठाता हूँ ,
स्वर नौका के पतवारी शब्द  ,
श्रीपाल क्षेम में पाता हूँ ,
बार-बार दोहराता हूँ ,
कहते नहीं अघाता हूँ ,
हर बार उन्हें बुलाता हूँ ,
" हे क्षेम शब्द दो " गाता हूँ.......
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Tuesday, 30 August 2011

बापू की सोच लिए, जन सेवा को एक और कदम..


  वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय द्वारा, प्रति माह ग्रामीण गरीबों के लिए  लगाये जाने वाला बापू बाज़ार पिछले रविवार को आज़मगढ़ जनपद के गंगा गौरी महाविद्यालय रामपुर में लगा.इस बापू बाज़ार में राष्ट्रीय सेवा योजना  की ४५ इकाइयों के छात्र- छात्राओं ने बाज़ार के लिए सामान जुटाए .बापू बाज़ार, महात्मा गाँधी जी की सोच को लेकर इस  विश्वविद्यालय के  कुलपति प्रो. सुन्दर लाल जी की प्रेरणा से  किसी ग्रामीण इलाके   में लगाया जाता हैं.
 इस बाज़ार की खासियत यह हैं कि इसमें बिकने वाला  सामान समाज के संभ्रात लोगों से मांग कर जुटाया जाता हैं  और गरीबों को मुफ्त देने के बजाय  प्रतीकात्मक मूल्य २ से १० रुपए रख कर उन्हें बेच दिया जाता हैं,जिससे   गरीबों की सहायता भी हो जाये और उनका आत्मसमान भी बना रहे. इस बार के बाज़ार में 
शिरकत करनें वाले लोंगों को   दूध और दही का भी स्वाद मिला  .      
बापू बाज़ार का शुभारम्भ  पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुन्दर लाल ने किया.बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ ही साथ समाज के बारे में भी सोचना चाहियें. हमारे समाज में गरीब अमीर सभी तरह के लोग रहते हैं. पूरा समाज तभी सुखी रह सकता हैं जब सबकी जरूरतें पूरी हो.गरीबों का विकास करना हम सभी का नैतिक कर्त्तव्य बनता हैं. 

  इस अवसर पर पधारे प्रदेश के उच्च शिक्षा सचिव
श्री अवनीश अवस्थी ने कहा कि समाज के बारे में किसी विश्वविद्यालय द्वारा इस तरीके की सोच रख कर ,जन सेवा के लिए बाज़ार लगाना अद्भुत हैं.उन्होंने छात्र- छात्राओं से अपील की कि जन सेवा का यह अभियान जारी रहे.
 एन एस एस के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ एस बी सिंह ने कहा कि बापू बाज़ार के लिए स्वयं सेवकों ने जो लगन दिखाई हैं वह निश्चित रूप से समाज के लिए उपयोगी होगा.
     चर्चित भोजपुरी लोक गायिका  मालिनी अवस्थी ने भी अपने गीतों से उपस्थित  लोंगों को  भाव-विभोर कर दिया .इस के साथ ही सुर संग्राम के मोहन राठौर, राकेश तिवारी के साथ अन्य कलाकारों ने भी गीत प्रस्तुत किये.कॉलेज के प्रबंधक शैलेन्द्र सिंह एवं गजेन्द्र सिंह के धन्यवाद ज्ञापन किया.
 इस बापू बाज़ार में  कपड़े,जूते,टोपी आदि दैनिक उपयोग की वस्तुएं बिकी. बाज़ार में सामान खरीदने के लिए लोग-बाग खूब सक्रिय रहे..

                                                                      



       मंच पर उपस्थित माननीय कुलपति जी और अन्य गणमान्य अतिथिगण

 प्रमाण पत्र देते माननीय कुलपति जी और प्रदेश के उच्च शिक्षा सचिव श्री अवनीश अवस्थी 


          उपस्थित लोंगो को संबोधित करते  माननीय कुलपति जी 

Tuesday, 16 August 2011

अपने अन्दर के लोकपाल को जागृत करें .....

स्वत्रन्त्रता दिवस के  पावन अवसर पर विश्वविद्यालय में ध्वजारोहण  के  पश्चात  विश्वविद्यालय के सम्मानित शिक्षक बन्धुओं ,अधिकारीगण और कर्मचारी भाइयों  को   स्वत्रन्त्रता दिवस की शुभकामना और बधाई   के साथ वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय   के  कुलपति प्रो.सुंदर लाल जी नें कहा कि हमारे देश ने स्वत्रन्त्रता पश्चात  प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल की  है .इस महान देश   को   सबके योगदान और  सहयोग से अभी बहुत आगे ले जाना है और यह तभी संभव है जब हम  अपने अन्दर के लोकपाल को जागृत करें .....
उन्होंने कहा कि  आज हम विज्ञान-तकनीक    ,सूचना तकनीक ,परिवहन ,कृषि,शिक्षा,न्याय ,अर्थ व्यवस्था, और सुशासन  में दुनिया के कई मुल्कों से बहुत आगे हैं.हम पर कभी राज करनें वाले लोग और देश आज स्वयं दंगों की आग में झुलस रहे हैं  लेकिन विश्व बंधुत्व -भाई चारा-अमन चैन में यकीन करने वाला हमारा देश हर चुनौतियों में  सदैव मजबूत होकर निकला है.आजादी के बाद हमनें लोंगों को रोटी और कपड़ा के लिए तरसते हुए देखा है लेकिन आज हमारे किसान भाई इतनी उपज पैदा कर रहे हैं कि हम दुनिया के अन्य मुल्कों तक इसे पहुंचा रहे हैं.
 स्वत्रन्त्रता आन्दोलन के अमर शहीदों को नमन करते हुए कुलपति जी नें कहा कि उनका बलिदान व्यर्थ न जाय इस लिए हम सब    अपने अन्दर के लोकपाल को जागृत करें ...और देश के विकास में अपनी भूमिका का निर्वहन  करें...उन्होंने कहा कि यदि आपनें अपनें अन्दर के लोकपाल को जागृत नहीं किया तो हम सब के  ऊपर बैठा  लोकपाल हमे कभी माफ़ नहीं करेगा,वह सब देख और सुन रहा है,उसकी लाठी में आवाज़ नहीं होती आपके जीवन काल में ही वह आप को न्याय दे देगा....
आज स्वत्रन्त्रता दिवस के  पावन अवसर विश्वविद्यालय परिसर में  पर्यावरण को समृद्ध रखनें के दृष्टिकोण  से बृक्ष  भी रोपित किये गये   ----
                                                  पौध रोपित करते माननीय कुलपति जी


पौध रोपित करते कुलसचिव  डॉ .बी .एल .आर्य


पौध रोपित करते करते परीक्षा नियंत्रक डॉ आर .एस .यादव ,डीन विद्यार्थी कल्याण प्रो.राम जी लाल और डॉ .राजेश  सिंह  

 
 पौध रोपित करते करते कुलपति  जी  के निजी सचिव   डॉ  के.एस.तोमर  ,विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री अमलदार यादव , विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष श्री सुशील प्रजापति और श्री रजनीश सिंह

Tuesday, 2 August 2011

बापू बाज़ार : पुष्पित और पल्लवित होता एक विचार

एक विचार को पल्लवित और पुष्पित होते देख कितनी खुशी होती है इसका अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है.अभी छ माह पूर्व तक बापू-बाज़ार क्या है,क्यों है ?इसके बारे में अपना समूचा पूर्वांचल अनजान था लेकिन आज ऐसा नहीं है .अब तक हमारे कुलपति प्रो सुन्दरलाल जी की प्रेरणा से  कुल तीन बापू-बाज़ार आयोजित किये जा चुके हैं जिसे समाज के लोंगों नें बहुत आशा और सम्मान के साथ आत्मसात किया है. बापू बाज़ार श्रृंखला के अंतर्गत रविवार को पब्लिक महिला सहर पीजी कालेज मुहम्मदाबाद मऊ में तीसरा बापू बाज़ार लगा.इस बाज़ार में बड़ी संख्या में गरीबों ने कपड़ों की खरीददारी की. गरीबों के लिए लगने वाला यह अनोखा बाज़ार हैं. इस बाज़ार की शुरुआत  जौनपुर से हुई थी. इसमें बिकने वाले सामानों को राष्ट्रीय सेवा योजना के कैडेटों द्वारा  समाज के लोगों से मांग कर जुटाया जाता हैं.गरीबों का आत्म सम्मान भी बना रहे और कपडे भी मिल जाये इसलिए  इनका प्रतीकात्मक मूल्य रख कर बापू बाज़ार में बेचा जाता हैं.इससे गरीबों की सम्मान सहित सहायता होती हैं.  
मऊ जनपद में आयोजित इस   बापू बाज़ार का शुभारम्भ  भी कुलपति प्रो सुन्दर लाल जी ने  ही किया.   इस अवसर पर आपनें   कहा कि बापू बाज़ार के लिए जिन विद्यार्थियों  ने सामानों को घर -घर जा कर  जुटाया हैं वह समाज और राष्ट्र के लिए  बहुत नेक काम कर रहे हैं  . बापू का सपना था कि  समाज का हर वर्ग कंधे से कन्धा मिला चले. जो गरीब हैं उनके उत्थान  के लिए भी हमें आगे आना चाहिए.बापू बाज़ार , एक बाज़ार नहीं हैं यह  एक विचार हैं जिसके कारण हमारे मन में समाज के निर्बल लोगों के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव आता हैं. हमें जीवन में वस्तुओं का मूल्य समझना चाहिए . बहुत सारी वस्तुएं जो हमारे लिए उपयोगी नहीं होती हैं. वह दूसरे  के लिए बहुमूल्य हो सकती हैं .इसलिए ये हमारी नैतिक रूप से जिम्मेदारी होती हैं कि हम इन वस्तुओं को जरूरतमंदों तक पहुचाएं. बापू बाज़ार के माध्यम से हम इसी काम को कर रहे हैं.छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन ही वह स्वर्णिम काल है जब अपनी पूरी ऊर्जा, त्याग-तपस्या के साथ देशसेवा में लगाई जा सकती है। इसके लिए कर्मपथ पर निरंतर अग्रसर रहना प्रथम आवश्यक शर्त है। हमें जीवन में वस्तुओं का मूल्य समझना चाहिए . बहुत सारी वस्तुएं जो हमारे लिए उपयोगी नहीं होती हैं. वो दूसरे के लिए बहुमूल्य हो सकती हैं .इसलिए ये हमारी नैतिक रूप से जिम्मेदारी होती हैं कि हम इन वस्तुओं  को जरूरतमंदों तक पहुचाएं. बापू बाज़ार के माध्यम से हम इसी काम को कर रहे हैं.    वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ हितेंद्र प्रताप सिंह की  सक्रिय पहल  और 33 राष्ट्रीय सेवा योजना की इकाइयों के सहयोग से आयोजित इस बाज़ार में बिकने वाले कपड़ो की कीमत  २ से १० रुपये रही. खास बात ये थी कि सिर्फ वो लोग इसमें खरीददार थे जो पहले से राष्ट्रीय सेवा योजना के कैडेटों द्वारा  चिन्हित किये गए थे.बाज़ार में जुटे हजारों लोगों नें  खूब खरीदारी की. इसमें साड़ी,पैंट,सलवार ,कमीज, आदि हर उम्र के लोगों के लिए कपडे , बर्तन आदि  थे.बाज़ार में मुफ्त में किताबें और खिलौनों को भी  दिया गया.बापू का चरखा भी इस बाज़ार में देखने को मिला .