Monday, 11 September 2017

तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन



 विश्वविद्यालय में चल रही ग्रोथ ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन द कैंपस ऑफ पूर्वांचल यूनिवर्सिटी विषयक तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ। समापन सत्र में देश के विभिन्न भागों से आये हुए  प्रतिभागियों को कुलपति प्रोफेसर डॉ. राजाराम यादव ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।  इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस  राष्ट्रीय कार्यशाला ने  विश्वविद्यालय में विज्ञान एवं तकनीकी के पाठ्यक्रमों के विकास एवं स्थापना की दिशा में   बड़ी भूमिका का निर्वहन किया  है।  उन्होंने देश के विभिन्न भागों से आए हुए अतिथियों को  सहभागिता के लिए उनका  धन्यवाद ज्ञापित किया।

 रविवार को आयोजित  सत्र में निस्केयर सीएसआईआर नई दिल्ली के निदेशक डॉ मनोज कुमार पटैरिया ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी की जानकारी को आम जन तक ले जाने का प्रयास सतत चले रहने चाहिए। विज्ञान संचार के लिए  स्थानीय भाषा एवं स्थानीय लोंगो की उपयोगिता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि  वैज्ञानिक साक्षरता एवं न्यूनतम विज्ञान की जानकारी और समझ विकसित कर के ही हम विज्ञान प्रसार के लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि स्वच्छ पेय जल का सेवन हमें अस्सी प्रतिशत बीमारियों से बचाता है।हमारे परंपरागत ज्ञान में पेय जल को  सूती कपड़े से छान कर पीने की परम्परा रही है। महंगे वाटर प्यूरीफायर की जगह हम परम्परागत आजमाए गए  तरीकों को अपनाकर बहुत सारी बीमारियों से बच सकते हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की  दैनिक जीवन में अहम भूमिका है। विज्ञान संचार से लोगों के जीवन स्तर को बदला जा सकता है। 

 काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजेंद्र कुमार सिंह ने क्लीन एनर्जी मेटेरियल एंड डिवाइसेस   विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज उर्जा का संरक्षण करने की जरूरत है इसके साथ ही पर्यावरण को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन द्वारा शीघ्र ही  उर्जा के लिए  हमें नए स्रोत  प्राप्त होंगे।
  
राजस्थान विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ सी.एस. पति त्रिपाठी ने नैनो मैटेरियल  फॉर रिन्यूवल एनर्जी एंड वाटर प्यूरिफिकेशन पर व्याख्यान दिया।  उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उर्जा व  जल का   संकट गहराने जा रहा है।  हम आर ओ  वाटर का प्रयोग करते हैं जो कि बहुत शुद्ध पानी है। लेकिन इस इस से पानी की बर्बादी बहुत होती है।  आज नैनो मैटेरियल के माध्यम से जल की बर्बादी के बिना जल का शुद्धिकरण किया जा सकता है। 
 शहडोल से आए डॉक्टर गिरधर माथंकर  ने कहा कि विश्वविद्यालय में विज्ञान और तकनीकी के विकास के लिए इको फ्रेंडली कैंपस बनाने की जरूरत है।  आईटी का इस्तेमाल करके यहां की कार्य संस्कृति  में सुधार लाया जा सकता है।  उन्होंने गोमूत्र एवं नीम के उपयोग के बारे में बताया। 

केंद्रीय विश्वविद्यालय सारनाथ के   डॉ. प्रवीण प्रकाश ने कहा कि प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत में चित्रकला बहुत ही समृद्ध रही है।  आज भारतीय सांस्कृतिक धरोहर में सांस्कृतिक पाठ्यक्रम  शुरू करने की जरूरत है। इससे भारतीय संस्कृति , इतिहास व कला के बारे में सही ज्ञान प्राप्त होगा  और सुदृढ़ सांस्कृतिक दृष्टिकोण बनेगा। 

 पुणे के  प्रो वीए  तभाने एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर केपी सिंह ने भी विषय पर अपने विचार रखे। 
अंतिम सत्र  में  डिप्लोमा इन फार्मेसी, एम फार्मा, होम्योपैथिक, गौ  विज्ञान व फाइन  आर्ट्स  विषयों के प्रारंभ करने पर चर्चा हुई।  जिसमें डॉ. मनोज पटैरिया , डॉ ए के श्रीवास्तव, प्रो  वीए  तभाने  , डॉ गिरधर माथंकर, डॉ वाई पी  कोहली, डॉ पुनीत सिंह  एवं डॉ अजय द्विवेदी ने विचार विमर्श किया। 

विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ पीसी  पातंजलि ने पहले सत्र की अध्यक्षता की एवं संचालन प्रो बीबी  तिवारी ने किया। 

 इस अवसर पर डॉ अरविंद कुमार तिवारी, डॉ युधिष्ठिर यादव,डॉ अलोक गुप्त,डॉ देवराज सिंह ,प्रियंका अवस्थी ,डॉ प्रमोद यादव,डॉ अनिल यादव ,डॉ गिरिधर मिश्र,डॉ धर्मेंद्र सिंह ,डॉ राजीव प्रकाश सिंह,डॉ. समर बहादुर सिंह, डॉ. विजय कुमार सिंह,डॉ ए के श्रीवास्तव, डॉ. देवराज सिंह, डॉ. अजय प्रताप सिंह,  डॉ राजकुमार सोनी, डॉ. संतोष कुमार सहित प्रतिभागी मौजूद रहे। 

Saturday, 9 September 2017

ग्रोथ ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी विषयक कार्यशाला--- दूसरा दिन


विश्वविद्यालय में आयोजित ग्रोथ ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी विषयक  कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने  परिचर्चा सत्र में अपनी बात रखी। एमएससी  के पाठ्यक्रम निर्माण एवं  आधारभूत संरचना के विकास पर चर्चा हुई। विश्वेसरैया  हाल में इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटानामिक  एनर्जी कला पक्कम  के प्रोफेसर पी पलानीचामी  ने अल्ट्रासाउंड की  प्रारंभिक जानकारी देते हुए उसके अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय अल्ट्रासाउंड आधारित पीजो इलेक्ट्रिक  डिवाइस का उपयोग हो रहा है।  अल्ट्रासाउंड के द्वारा अनाज के आकार व गुणवत्ता की जांच की जा रही है। पदार्थों का परीक्षण अल्ट्रासाउंड के द्वारा बिना स्वरूप परिवर्तन के संभव हो पाया है।  उन्होंने कहा कि अब सब्जियों के उत्पादन में कीटनाशकों की जगह नीम से निर्मित जैविक  कीटनाशकों का प्रयोग हो रहा है।  इससे सब्जियों की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है।  पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग बड़े पैमाने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में कई वनस्पतियों में जैविक खेती  को बढ़ावा देने की क्षमता है। ओएनजीसी के पूर्व महाप्रबंधक डॉक्टर पी के मिश्रा ने कहा कि किसी देश के अधोपतन के लिए आइटम बम या महामारी का उतना योगदान नहीं होगा जितना   उस देश की शिक्षा व्यवस्था के विनष्ट हो जाने पर।  उन्होंने कहा कि उत्पादों के उपभोग के क्षेत्र में भारत एशिया का तीसरा तीसरा सबसे बड़ा देश है जो पेट्रोलियम का उत्पादन व शोध कर रहा है। आने वाले समय में इसका और भी विस्तार होगा। उन्होंने भारत में पेट्रोलियम कंपनियों पर भी अपनी बात रखी। 
विज्ञान भारती के प्रदेश अध्यक्ष वाई पी  कोहली ने कहा की परंपरागत ज्ञान- विज्ञान को विज्ञान व तकनीकी के नए शोध कार्यों से जोड़ा जाए। हमें आम आदमी के दहलीज तक हम विज्ञान का प्रकाश लेकर जाना  हैं।  उन्होंने जौनपुर क्षेत्र के मक्के व मूली के उत्पादों के संरक्षण एवं विक्रय को आर्थिक विकास से जोड़कर  अपनी बात रखी। 
 आईआईटी  खड़कपुर  के डॉक्टर मेहरवान ने बिना दर्द के इंजेक्शन तकनीक के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नैनो तकनीकी की सहायता से त्रिआयामी प्रिंटिंग के जरिए मरीजों को दर्द मुक्त  तरीके से इंजेक्शन देना संभव हो सका है।  इस क्षेत्र में हम बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं। इस अवसर पर डॉक्टर मनोज पटैरिया, डॉक्टर वी ए तभाने , डॉक्टर शबाना शेख, डॉक्टर लोकेंद्र कुमार, डॉक्टर गिरिधर  ,प्रोफेसर रंजना प्रकाश, प्रोफेसर रामकृपाल, डॉक्टर देवराज सिंह, डॉक्टर शिवाकांत शुक्ला आदि उपस्थित रहे
कार्यशाला के द्वितीय सत्र में एमएससी भौतिकी ,रसायन एवं गणित विषय के पाठ्यक्रमों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही कंप्यूटर  एप्लीकेशन में पीजी डिप्लोमा एवं बीसीए पाठ्यक्रम तैयार करने पर मंथन हुआ। इस सत्र में  प्रोफ़ेसर राम कृपाल,प्रो बलिराम एवं डॉ सत्यदेव ने  अपने विचार रखे ।तकनीकी सत्र को सबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के   पूर्व कुलपति डॉ पीसी पातंजलि ने कहा कि  विज्ञान एवं तकनीकी को   धरातल पर लाये बगैर   विकास की बात बेमानी है। उन्होंने कहा  कि  क्षेत्र विशेष की भावना का   सम्मान करते हुए पाठ्यक्रम में हिंदी भाषी विद्यार्थियों का ध्यान रखा जाय। उन्होंने समय की मांग को देखते हुए और भी विश्वविद्यालयों की स्थापना पर बल दिया। सत्र की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो आर पी सिंह ने की।  कार्यशाला के अध्यक्ष प्रो बीबी तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
 






 

Friday, 8 September 2017

'ग्रोथ ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन द यूनिवर्सिटी कैंपस' विषयक कार्यशाला


विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में शुक्रवार को 'ग्रोथ ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन द यूनिवर्सिटी कैंपस' विषयक कार्यशाला का उद्घाटन हुआ। उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफ़ेसर कृष्ण लाल ने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसा रोड मैप तैयार करें जो यहां से निकलने वाले छात्रों को देश के निर्माण से जोड़े।

 उन्होंने कहा कि आज गुणवत्तायुक्त शिक्षा का सवाल है इस दिशा में देश के विश्वविद्यालयों को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। 2011 की जनगणना में साक्षरता 74 प्रतिशत थी अभी भी 30 करोड़ भारतीय शिक्षा से  दूर है  जिनके लिए हम लोगों को काम करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि उपनिषद में विज्ञान को परिभाषित किया गया है 'विज्ञानम् आनंदम ब्रह्म' विज्ञान में जो अंतिम आनंद है वही ब्रह्म है।  यह हमारे लिए महामंत्र है जिसे सदैव चित्त  में रखना चाहिए।


विज्ञान भारती दिल्ली  के महासचिव डॉ ए  जय कुमार ने कहा कि यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के सपने को साकार करेगी। समाज निर्माण में विश्वविद्यालयों की बड़ी भूमिका है। आज वैश्विक स्तर पर एक नए क्षेत्र का निर्माण हो रहा है। भारत में पहली बार राजनीतिक चिंतक व विद्वान मिलकर मेक इन इंडिया  के लिए काम कर रहे हैं।

विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिकी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफ़ेसर बीके अग्रवाल ने कहा कि आज देश की प्रगति के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञों की आवश्यकता है। शिक्षा जगत को इस पर गहनता से विचार करने की जरूरत है। नवोन्मेष तभी होंगे जब गहन अध्ययन होगा। आज विशेषज्ञ वही बन सकता है जिसे अपने क्षेत्र के समस्त आयामों का ज्ञान हो। उन्होंने कहा कि चीन में लक्ष्य बना कर लोग काम कर रहे हैं और दूसरे देशों को सस्ते दर पर वस्तुएं उपलब्ध करा रहे हैं।इस दिशा में हमें भी चिंतन करने की जरूरत है।

कुलपति प्रोफेसर डॉक्टर राजाराम यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में बेसिक साइंस होना आवश्यक है जब तक बेसिक साइंस की पढ़ाई व शोध नहीं होगा तब तक आगे की कल्पना  नहीं की जा सकती।तीन  दिनों की कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से आए हुए वैज्ञानिक मिलकर एक ऐसा प्रस्ताव तैयार करेंगे जिसे राज्य एवं  केंद्र सरकारों के पास भेजा जाएगा और भविष्य में इन पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालय में संचालित किया जाएगा।  शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में पोस्ट डॉक्टोरल फ़ेलोशिप प्रारम्भ की गई है। उन्होंने आए हुए विशेषज्ञों का परिचय कराया। 

कार्यशाला के अध्यक्ष प्रो बीबी तिवारी ने स्वागत भाषण एवं डॉक्टर राजकुमार सोनी ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर संतोष कुमार ने किया। इस अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो आर पी सिंह एवं कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति  प्रो कीर्ति सिंह मंचासीन रहे। तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने अपनी  बात रखी.प्रो वी के अग्रवाल ने ग्रेफीन की गुणवत्ता एवं महत्व तो बताया। लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो आर पी  सिंह ने  प्रशासनिक, शिक्षकों एवं छात्रों की गुणवत्ता सुधार पर बात की। दिल्ली के  प्रो नीरज खरे ने सामाजिक जरूरतों के मद्देनजर विश्वविद्यालय में बेसिक साइंस के पाठ्यक्रमों को खोलने की बात की। 

कार्यशाला  में देश के विभिन्न भागों से आये हुए विषय विशेषज्ञ निदेशक निस्केयर-सीएसआईआर डॉ मनोज कुमार पटैरिया , प्रो सुनीता मिश्राप्रोफेसर रंजना प्रकाशप्रो  राम कृपाल,प्रोपी.एस यादव,प्रो  पीके मिश्राप्रो  वी  ताभाने डॉ लोकेंद्र कुमार, डॉ युधिष्ठिर यादव,डॉ  अंबेशदीक्षित,प्रो  पी पालानिचमी,डॉ वी राजेंद्रन,प्रो राजीव कुमार,प्रोफेसर नीरज खरेडॉ सीएस पतित्रिपाठी,डॉ  देवराज सिंह, डॉ  गिरिधर मिश्रा एवं  डॉ  प्रमोद यादव आदि ने प्रतिभाग किया  । 

Tuesday, 5 September 2017

शिक्षक दिवस समारोह मनाया गया




वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में शिक्षक दिवस मनाया धूम धाम से मनाया गया.परिसर  में स्थापित सर्वपल्ली डॉ  राधाकृष्णन की प्रतिमा पर शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने माल्यार्पण का उन्हें नमन किया।सामाजिक विज्ञान संकाय के अध्यक्ष डॉ अजय प्रताप सिंह ने कहा कि सर्वपल्ली राधाकृष्णन के आदर्श हमें आज भी प्रेरणा देते है.विद्यार्थियों के बिना शिक्षक का कोई अस्तित्व नहीं है. जनसंचार विभाग के शिक्षक डॉ मनोज मिश्र ने कहा कि गुरु और शिष्य एक दूसरे के पूरक है और हर गुरु की एक चाह होती है कि उसके  शिष्य उससे आगे जाएँ। इस अवसर पर डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ सुनील कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर डॉ राजेश शर्मा, डॉ एस पी तिवारी,डॉ आशुतोष सिंह,डॉ कार्तिकेय शुक्ला,विनय वर्मा, ऋषि श्रीवास्तव समेत विद्यार्थीगण मौजूद रहे.