Tuesday, 2 May 2017

कुलपति प्रो राजाराम यादव ने कार्यभार ग्रहण किया


जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के नवागत कुलपति प्रो राजाराम यादव ने मंगलवार को पूर्वाहन 17 वें  कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। प्रो यादव इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में बतौर प्रोफ़ेसर कार्य कर रहे थे.प्रो यादव अल्ट्रासोनिक के जाने माने विशेषज्ञ हैं।उन्हें नैनोसाइंस एंड टेक्नोलॉजी आप्टिकल आौर थर्मल प्रापर्टीज में भी विशेषज्ञता हासिल है । पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने   परिसर के शिक्षकों के साथ कुलपति सभागार में बैठक की.बैठक में कुलपति प्रो यादव ने शिक्षकों से परिचय प्राप्त किया और विश्वविद्यालय के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की.
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।आने वाले समय में  विश्वविद्यालय परिसर में नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी जिससे  शोध को बढ़ावा मिलेगा।उन्होंने कहा कि छात्र मेरे लिए भगवान है और उनकी हर समस्याओं को व्यक्तिगत स्तर पर दूर करने का काम करूंगा।कहा कि जो शिक्षक गुणवत्तायुक्त शोध पत्र लिखेंगे उनके लिए विशेष प्रोत्साहन योजना लागू की जाएगी जिससे उनका उत्साह वर्धन होगा। विश्वविद्यालय के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों की एक समिति बनाकर शोध व शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाया जाएगा।
 निवर्तमान कुलपति प्रोफेसर पीयूष रंजन अग्रवाल एवं कुलसचिव डॉ देवराज ने प्रोफेसर राजाराम यादव को कुलपति की कुर्सी पर बैठाया।कुलपति प्रो यादव को शिक्षक, अधिकारियों और कर्मचारियों में माला पहना कर स्वागत किया।  इस अवसर पर वित्त अधिकारी एम के सिंह, प्रोफेसर बीबी  तिवारी, डॉ दीनानाथ सिंह, डॉ ए के श्रीवास्तव, डॉ मानस पांडे, डॉ अविनाश पर्थिडेकर, डॉ मनोज मिश्रा,डॉ दिग्विजय सिंह राठौर,डॉ सुनील कुमार, डॉ सुरजीत यादव, डॉ संतोष कुमार, अमित वत्स,डॉ आशुतोष सिंह,डॉ अवध बिहारी सिंह,  डॉ के एस तोमर,डॉ वंदना राय,डॉ विजय तिवारी, डॉ अनुराग मिश्र समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे.

निवर्तमान कुलपति प्रो पीयूष रंजन को दी विदाई 
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपति प्रोफेसर पीयूष रंजन अग्रवाल को कुलपति आवास पर विश्वविद्यालय के शिक्षक,अधिकारी एवं कर्मचारियों ने विदाई दी. इस अवसर पर प्रो अग्रवाल ने कहा कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय के लोगों में जो प्रतिभा है वो किसी से कम नहीं है.यहां सभी ने मिल कर विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने में अपनी महती भूमिका अदा की है.इस विश्वविद्यालय में लोगों के बीच परिवार का भाव है जो हर परिस्थिति में दिखता है. विश्वविद्यालय नई ऊचाइयों पर पहुंचे यही कामना है. 
कुलपति आवास पर हुई बैठक में विश्वविद्यालय परिसर के  शिक्षकों ने एक स्वर में प्रो पीयूष रंजन अग्रवाल  द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा की और कहा कि विश्वविद्यालय को सवारने में बड़ी भूमिका अदा की है. विश्वविद्यालय ने  समय से परीक्षा परिणाम देकर प्रदेश में उपलब्धि हासिल की है. प्रो अग्रवाल को विभिन्न विभागों के शिक्षकों ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस अवसर पर  वित्त अधिकारी एम के सिंह, कुलसचिव डॉ देवराज,  प्रो बी बी तिवारी,डॉ यूपी सिंह, डॉ अनिल सिंह,  डॉ मानस पांडेय,डॉ  नारायण,डॉ दुर्गा प्रसाद अस्थाना, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ नूपुर तिवारी,डॉ रसिकेश  समेत तमाम लोग उपस्थित रहे. 

Saturday, 29 April 2017

अध्यात्म एवं जीवन प्रबंधन विषयक दो दिवसीय कार्यशाला

 वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में संकाय भवन स्थित कांफ्रेंस हाल में  अध्यात्म एवं जीवन प्रबंधन विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारियों का आध्यात्मिक उन्नयन करना है।कार्यशाला के मुख्य अतिथि , विषय विशेषज्ञ हरिद्वार देव संस्कृति विश्वविद्यालय के डॉ गोपाल कृष्ण शर्मा ने कहा कि वर्तमान में एकल परिवारों में तनाव आम बात हो गयी है जबकि पहले संयुक्त परिवारो में ऐसा नही था। आज हम अध्यात्म को अपना कर  अवसान रहित जीवन जी सकते  है और व्यक्तित्व को सकारात्मक बना सकते है।उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपतिप्रो पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि आध्यात्म को अपनाकर हम सहज जीवन जी सकते हैं।योग हमारी पुरानी परंपरा है।नियमित योगाभ्यास हमे बहुत सारी समस्याओं से निजात दिलाता है।अध्यक्षता करते हुए
प्रो धरणीधर दुबे ने कहा कि विलासिता पूर्ण जीवन सारी समस्याओं की जड़ है।हमें आध्यात्म से शारीरिक ही नही मानसिक संतुष्टि भी मिलती है। कार्यशाला केआयोजन सचिवडॉ अविनाश पाथर्डीकर नें कार्यशाला के उद्देश्य और औचित्य पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के चलते रहने से नई सीख मिलती है।हरिद्वार से आये विषय विशेषज्ञ डॉ पंकज चंदेल ने तकनीकी सत्रों में आध्यात्म और जीवन पर प्रकाश डाला।इस अवसर पर प्रो एके श्रीवास्तव,  डॉ वी डी शर्मा, कुलसचिव डॉ देवराज,  डॉ आशुतोष सिंह, डॉ अमित वत्स, डॉ प्रदीप कुमार, डॉ राम नारायण, डॉ एस पी तिवारी, डॉ सुधीर डॉ संजय श्रीवास्तव, श्री एमएम भट्ट, श्री राजनारायण सिंह, डॉ धर्मशीला गुप्ता  सहित परिसर के कर्मचारी, शिक्षक एवं परिवार गण मौजूद रहे।स्वागत  डॉ धर्मेंद्र सिंह  एवं संचालन डॉ अविनाश पाथर्डीकर द्वारा किया गया।
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कार्यशाला   समापन 



वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के  संकाय भवन स्थित कांफ्रेंस हाल में  अध्यात्म एवं जीवन प्रबंधन विषयक दो दिवसीय कार्यशाला  का समापन  शनिवार को किया गया।  कार्यशाला के  प्रतिभागियों  ने ऐसे आयोजन के लिए आयोजन मंडल को धन्यवाद ज्ञापित किया और अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह कार्यशाला  शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारियों के  आध्यात्मिक उन्नयन में महत्वपूर्ण है ।
तकनीकी सत्र में  व्यक्तित्व के चार आयामों भौतिक  मानसिक सामाजिक आध्यात्मिक तथा अध्यात्म एवं आत्म प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आध्यात्मिक व्यक्तित्व ही शेष तीनो आयामों को संभालता है। तकनीकी सत्र में योग  की क्रियाएं करवाई गयीं। इस अवसर पर  सानंद जीवन जीने हेतु  एक वृत्त चित्र का प्रदर्शन किया गया ।
समापन सत्र में  आयोजन सचिव डॉ अविनाश पाथर्डीकर  ने कहा कि जीवन में  संतुष्टि से बढ़ कर कुछ नहीं है। जीवन में हमेशा कुछ प्राप्त करने की होड़ ने हमे तनाव ग्रस्त कर दिया है परिणामतः आज रिश्ते -नाते टूट रहे हैं। धन लिप्सा सारे  समस्याओं की जड़  है। विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ धर्मेंद्र सिंह ने कहा  कि विश्वविद्यालय परिसर के शिक्षक एवं कर्मचारियों के परिवार के आध्यात्मिक एवं मानसिक उन्नयन के लिए आने वाले समय मे भी विवि  इस प्रकार का   आयोजन करेगा। कर्मचारी संघ के पूर्व उपाध्यक्ष  सुशील प्रजापति ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद  ज्ञापित किया। प्रतिभागियों ने  कार्यक्रम के अंत में मोमबत्ती जलाकर संकल्प लिया कि  आत्मदीपो भव होकर एक प्रकाशपुंज की तरह  वे परिसर में कार्य करते रहेंगे । 
इस अवसर पर प्रोफ़ेसर डीडी दुबे , प्रो एके श्रीवास्तव,  डॉ वी डी शर्मा, कुलसचिव डॉ देवराज,  डॉ आशुतोष सिंह, डॉ अमित वत्स,  डॉ प्रदीप कुमार, डॉ राम नारायण, डॉ एस पी तिवारी,डॉ सुधीर  डॉ संजय श्रीवास्तव, श्री एमएम भट्ट, श्री राजनारायण सिंह, डॉ धर्मशीला गुप्ता   सहित परिसर के कर्मचारी, शिक्षक एवं परिवार गण मौजूद रहे।संचालन डॉ अविनाश पाथर्डीकर ने किया ।

Thursday, 27 April 2017

लोगों की आशा का केंद्र है विश्वविद्यालय- प्रो. पीयूष

समारोह कर शिक्षकों ने दी विदाई, बताया स्वर्णिम कार्यकाल

विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने बुधवार की शाम परिसर में समारोह आयोजित कर कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल को विदाई दी। अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह देकर उन्हें सम्मानित किया गया। उनके कार्यकाल को एक स्वर्णिम काल बताते हुए वक्ताओं ने अपने अनुभवों को साझा किया।
प्रो. डीडी दुबे, प्रो. बीबी तिवारी, वित्त अधिकारी एमके सिंह, कुलसचिव डा. देवराज, प्रो. संगीता साहू, डा. मनोज मिश्र, डा. एके श्रीवास्तव, डा. अमित वत्स व विनय वर्मा ने कुलपति के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की। कहा कि उन्होंने सिस्टम में सुधार किया। कार्यकाल में नैक मूल्यांकन, परीक्षा एवं रिजल्ट सुधार, खिलाड़ी सम्मान समारोह, शैक्षणिक वातावरण निर्माण, शोध अनुसंधान के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए। संस्था का विकास सर्वोपरि रखा। विश्वविद्यालय के हर बिंदु को समझने में अपना महत्वपूर्ण समय दिया। सरल व्यक्तित्व आपकी पहचान है। सभी के दुख-दर्द को समझा, हर संभव मदद की। 
कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि मेरा इसमें कुछ नहीं है। सभी के सहयोग से संभव हुआ। जब आप किसी संस्थान को समृद्ध करते हैं तो वह आपके व्यक्तित्व को भी बढ़ाता है। सभी को साथ लेकर चलने की आदत डालनी चाहिए। यदि आपमें जागरूकता व चाह है तो मंजिल जरूर मिलेगी। विश्वविद्यालय लोगों की आशा का केंद्र है। ज्ञान का मंदिर है। इससे समाज को प्रकाशित करें। सबको आपसे आशाएं हैं। सामाजिक संरचना में आपको जान पहचान बनाए बगैर समस्याओं से निजात नहीं मिलने वाली। विद्यार्थियों को प्रयोगशालाओं में अधिक व्यस्त रखें, उन्हें कुछ नया दें। आप सर्वश्रेष्ठ रहें यह भाव सदा मन में हो। संभावनाओं की तलाश हमेशा जारी रखें। सभी को जिम्मेदारियों से मैंने जोड़े रखा। इसका उद्देश्य यही था कि एक ओर जहां संस्थान को गति मिले, दूसरी ओर आप परिसर के प्रत्येक बिंदु से जुड़ सकें। मन में सदा सोचें कि हम समाज व संस्थान को क्या दे रहे हैं। इस अवसर पर कुलपति की पत्नी प्रतिभा अग्रवाल, डा. मानस पांडेय, डा. बीडी शर्मा, उपकुलसविच संजीव सिंह, डा. टीबी सिंह, डा. राम नारायन, डा. वंदना राय, डा. अजय द्विवेदी, डा. प्रदीप कुमार, डा. राजकुमार, संजीव गंगवार, डा. रसिकेश, डा. सुनील कुमार, डा. सुशील कुमार सिंह, धर्मेंद्र सिंह, डा. आलोक सिंह, डा. परमेंद्र सिंह, आलोक दास, डा. विवेक पांडेय, डा. केएस तोमर, सुबोध पांडेय, लक्ष्मी प्रसाद मौर्या आदि उपस्थित रहे। संचालन डा. अविनाश पाथर्डिकर व धन्यवाद डा. आशुतोष सिंह ने किया।