Saturday, 24 September 2016

एचआरडी एवं व्यावसायिक अर्थशास्त्र विभाग द्वारा पुरातन छात्र सम्मेलन 2016 का आयोजन



विश्वविद्यालय के एचआरडी एवं व्यावसायिक अर्थशास्त्र विभाग द्वारा फार्मेसी संकाय स्थित कांफ्रेन्स हाल में शनिवार को पुरातन छात्र सम्मेलन 2016 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि पुरातन छात्र विश्वविद्यालय की एक कड़ी होते हैं। एक समयावधि के बाद व्यक्ति खुद की प्रतिभा पर कार्य करता है। उपस्थित सभी पुरातन विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि आप विश्वविद्यालय की धरोहर हैं। आशा है भविष्य में आप संस्थान का नाम पूरी दुनिया में रोशन करेंगे। 
स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष डाॅ. अविनाश पाथर्डीकर ने कहा कि आज पुरातन विद्यार्थियों के अनुभव से हमारे वर्तमान विद्यार्थी नयी शिक्षा ग्रहण करेंगे। यही शिक्षा जीवन जीने की कला है। विश्वविद्यालय के पूर्व डीन प्रो. वीके सिंह ने इस अवसर पर अपने अनुभवों को साझा किया एवं विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण सुझाव दिया।
संकायाध्यक्ष डाॅ. वीडी शर्मा ने पुरातन छात्रों को सम्मेलन में शामिल होने के लिए साधुवाद दिया। धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. रसिकेश ने किया।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में पुरातन छात्रों के संघ का गठन किया गया जिसमें सर्वसम्मति से श्री रंजीत सिंह को अध्यक्ष, रानू सिंह को उपाध्यक्ष, कविता सिंह को सचिव व दीक्षा सिंह को कोषाध्यक्ष चुना गया। नीतिन एवं विकास देव को सह सचिव के रूप में मनोनीत किया गया। 
पुरातन छात्र सम्मेलन के अंत में मानसी श्रीवास्तव, शेफाली, प्रीति, आकाश, कृतिका, हिजाब, एरम शकील, द्विव्यांश, शिखा सिंह एवं अराधना श्रीवास्तव ने पुरातन छात्रों पर आधारित नाटक ‘‘छोड़ आये हम वोे गलियां’’ का मंचन किया।
इस अवसर पर डाॅ. एके श्रीवास्तव, डाॅ. मनोज मिश्र, डाॅ. विनय वर्मा, डाॅ. अनुपम कुमार आदि उपस्थित रहे। संचालन कमलेश कुमार मौर्य एवं अभिनव श्रीवास्तव ने किया। 

विश्वविद्यालय के वित्तीय अध्ययन विभाग में पुरातन छात्र सम्मेलन


 विश्वविद्यालय के वित्तीय अध्ययन विभाग में शनिवार को पुरातन छात्र सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में देश के बाहर के भी पूर्व विद्यार्थियों ने भी शिरकत किया। इस अवसर पर जेद्दा सऊदी अरबिया के किंग अब्दुल अजीज विश्वविद्यालय के प्रो. जैद अहमद अंसारी ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए एक लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने जीवन के महत्वपूर्ण क्षण इस विश्वविद्यालय परिसर में बिताये हैं। आगे बढ़ने और कुछ बनने की सीख मुझे यहीं से मिली। आज मुझे गर्व कि मेरे विश्वविद्यालय से निकले लोग पूरे विश्व की सेवा कर रहे हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि पढ़ाई के साथ-साथ समाजसेवा के क्षेत्र में आगे आयें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वह मेहनत से पढ़ाई करें यही उनका मुख्य धर्म है। आगे कहा कि शिक्षक के बिना ज्ञान अधूरा है इसीलिए वह अपने शिक्षकों का सम्मान भी करें। उनका मानना है कि अगर किसी विद्यार्थी को प्रतिस्पर्धा में शामिल होना है तो उन्हें अपने आप से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी।
अध्यक्षीय सम्बोधन करते हुए विभागाध्यक्ष डाॅ. अजय द्विवेदी ने कहा कि डीएफएसएल के मंत्र को अपनाने वाला ही सफल होता है। उन्होंने इस पर विस्तार से व्याख्या करते हुए बताया कि पहले करिये बाद में कहिये (डू फस्र्ट, से लेट)। उन्होंने पूर्व विभागाध्यक्ष एसके सिन्हा के कार्यों की भी तारीफ की।
पुरातन छात्र एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कम्पनी मामलों के जानकार चन्द्रमौली द्विवेदी ने सोसाइटी ट्रेड मार्क, स्टार्ट अप जैसे नये व्यवसाय के रजिस्ट्रेशन और उससे आने वाली समस्याओं के तकनीकी विषयों पर चर्चा की।
विभाग के प्राध्यापक सुशील कुमार ने एल्यूमिनी शब्द की विस्तार से व्याख्या की। कहा कि संस्थान से जो कुछ मिला है उसे समाज को देने वाला ही छात्र असली पुरातन छात्र है। 
संचालन विभाग के विद्यार्थी मनीष अग्रहरि एवं रितू श्रीवास्तव तथा धन्यवाद ज्ञापन बागमिता श्रीवास्तव ने किया। इस पुरातन छात्र सम्मेलन के अवसर पर देश के विभिन्न प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों में कार्यरत एक दर्जन से अधिक पुरातन विद्यार्थियों ने भाग लिया एवं अपने विचारों को लोगों से साझा किया। इस अवसर पर आलोक गुप्ता, रोहित पाण्डेय, चन्द्रमौली द्विवेदी, चन्द्रशेखर, रवि कुमार, मो. अबु सलेह, जैनुल आब्दीन, हीना अख्तर, रूप कुमारी ओझा, अर्षिता त्रिपाठी, अंकिता श्रीवास्तव, रूपाली अग्रहरि, पूजा मोदनवाल, रूश्दा आजमी, पूजा खुराना, मोनिका, यशस्वी, रितू, शहबाज, अनुराग उपाध्याय आदि पुरातन विद्यार्थियों ने विचार व्यक्त किये। 

Thursday, 22 September 2016

वित्तीय अध्ययन विभाग में शिक्षक -अभिभावक बैठक 'मंथन' का आयोजन




 विश्वविद्यालय के वित्तीय अध्ययन विभाग में शिक्षक -अभिभावक बैठक 'मंथन' का आयोजन किया गया। जिसमें छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए उनसे  जुड़े विभिन्न विषयों पर अभिभावकों के साथ चर्चा हुई. 

विभाग के अध्यक्ष  डा० अजय द्विवेदी  ने मंथन कार्यक्रम में अभिभावकों से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के विविध पहलुओं  पर विस्तार से अपनी बात रखी.  
उन्होंने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में उद्द्योग जगत में जिस प्रकार के विशेषज्ञों की मांग है हमारा विभाग उनकी मांग के अनुसार विशेषज्ञ तैयार कर रहा है। आज पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस क्षेत्र में वित्त प्रबंधकों की जो फौज तैयार की रही है वह वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है.अन्तर राष्ट्रीय स्तर पर जो वित्त के उच्च संस्थानों की मांग है उसकी पूर्ति करने में विभाग हर स्तर पर प्रयासरत है. इसी क्रम में विभाग द्वारा फाइनेंसियल मॉडलिंग, बिज़नेस वैल्यूएशन, मर्जर एवं टेक ओवर जैसे गंभीर विषय पाठ्यक्रम में शामिल किये गए हैं और छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान  दिया जा रहा है. 

मंथन में अभिभावकों से खुलकर चर्चा हुई. उन्होंने यह आशा व्यक्त  की कि विभाग उनके बच्चों के एक आत्मविश्वाश पैदा करें जिससे वह  जीवन में हर कठिनाइयों का सामना कर सकें। शिक्षकों ने अभिभावकों को यह विश्वास दिलाया कि एक परिवार की भांति सब मिलकर विद्यार्थियों के विकास के लिए प्रयासरत रहेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत में  शिक्षकों  व अभिभावकों का स्वागत  सुशील कुमार ने किया।अभिभावकों ने  विभाग से यह अपेक्षा की कि  डिग्री के उपरांत उनकी संतान एक अच्छा ज़िम्मेदार नागरिक बनें ।कार्यक्रम में विद्यार्थियों के अभिवावकों से छात्रवॉर पूरी जानकारी ली गई और छात्र के परफॉरमेंस के बारे में भी बताया गया. विभाग के प्राध्यापक अबू सालेह ने कहा कि विद्यार्थियों को अच्छा वित्त विश्लेषक बनाने हेतु विभाग सदैव तत्पर रहता है।  प्राध्यापक  सुशील ने कहा कि सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षकों के साथ साथ  अभिभावकों  की बराबर की ज़िम्मेदारी है अपनी पूरी दिनचर्या का कुछ हिस्सा छात्र अपने शिक्षकों के साथ व्यतीत करते है जिसमें शिक्षक तत्पर रहता है कि उन्हें  ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी ना केवल पाठ्यक्रम से सम्बंधित अपितु समाज के बारे में देता है विभाग के प्राध्यापक डा अलोक गुप्ता ने कहा की हमारा पाठ्यक्रम परास्नातक स्तर का है जिसमे छात्रों  को किताबी जानकारी के साथ ही  व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है. 
विभाग के तृतीय सेमेस्टर की छात्रा शिखा दुबे ने विभाग में हुई विभिन्न गतिविधियों के बारे में पॉवर पॉइंट के माध्यम से अभिभावकों को जानकारी उपलब्ध कराई।धन्यवाद ज्ञापन विभाग के प्राध्यापक अबू सलेह ने किया। इस अवसर डा० मनोज मिश्रा, डा० रशिकेश, डा० दिग्विजय सिंह राठौर, वसीम अहमद, मुन्नी देवी, नगमा बानो , सतीश सोनी, दीन दयाल सिंह, कृष्ण कुमार सेठ, बेचू कन्नौजिया समेत  विभाग के विद्यार्थी मौजूद रहे. 

Tuesday, 20 September 2016

सीबीसीएस पर कार्यशिविर आयोजित



प्रो जनक पांडेय 
दीप प्रज्वलन करते कुलपति प्रो पीयूष रंजन अग्रवाल 
फार्मेसी संस्थान स्थित शोध एवं नवाचार केन्द्र में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) पर मंगलवार को कार्यशिविर आयोजित किया गया। इस कार्यशिविर में अध्ययन परिषद के सदस्यगण एवं विश्वविद्यालय के सभी संकायों के संकायाध्यक्ष शामिल हुए। कार्यशिविर के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य वक्ता बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जनक पाण्डेय ने कहा कि छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व विकास के लिए समग्र शिक्षा एवं अंतरविषयी शिक्षा प्रणाली को उपयोग में लाना जरूरी है। सीबीसीएस प्रणाली के अंतर्गत छात्र अपनी मर्जी विभिन्न विषयों का चयन कर सकते हैं। इसके अंतर्गत वार्षिक के बजाय सेमेस्टर परीक्षा पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई विद्यार्थी किसी विश्वविद्यालय में किसी सेमेस्टर को उत्तीर्ण किया है  और अगले सेमेस्टर को किसी अन्य विश्वविद्यालय से करना चाहता है तो उसे इस प्रणाली के लागू होने से आसानी होगी। इससे जुड़े सभी विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम प्रणाली एक जैसी होती है। इस प्रणाली को देशभर के विश्वविद्यालय में लागू करने के लिए सबसे पहले छात्रों को शिक्षकों एवं शिक्षा प्रणाली तथा शिक्षकों को स्वयं पर विश्वास होना चाहिए। इस प्रणाली के लागू होने से शिक्षा के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित होंगे।

अध्यक्षता कर रहे पूविवि के कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशानुसार सीबीसीएस प्रणाली को पूरे देश के विश्वविद्यालयों में लागू किया जाना है जिससे कि पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन प्रणाली की समानता को सुनिश्चित किया जा सके। शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से आगामी सत्र से विश्वविद्यालयों में क्रेडिट बेस्ड च्वाइस सिस्टम (सीबीसीएस) लागू करने की तैयारी है। इसके तहत विद्यार्थियों की ओवरआल रैंकिंग हो सकेगी। वार्षिक परीक्षा प्रणाली से सीबीसीएस प्रणाली में शिफ्ट करना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए विश्वविद्यालय की पूरी व्यवस्था को नये ढंग से व्यवस्थित किये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रथमतया पाठ्यक्रम निर्माण, अध्ययन, मूल्यांकन एवं परिणाम का मानकीकरण इस व्यवस्था के अभिन्न पहलू हैं। 
बीएचयू के प्रो. जेपी श्रीवास्तव ने कहा कि सीबीसीएस सिस्टम विद्यार्थी को पाठ्यक्रम संबंधी लचीले विकल्प प्रस्तुत करता है।  क्रेडिट बेस्ड च्चाइस सिस्टम से छात्रों की ओवरआल रैंकिंग की जा सकेगी। विद्यार्थी के पास मूल विषय से इतर अन्य पाठ्यक्रम के रूचिकर एवं प्रायोगिक विषयों को पढ़ने का मौका मिलता है। कौशल विकास एवं भाषा विकास संबंधी माड्यूल, इंटर्नशिप, लघु शोध प्रबंध आदि भी सीबीसीएस के क्रेडिट का हिस्सा है।
स्वागत उप कुलसचिव संजीव सिंह, कार्यशाला की रूपरेखा एवं संचालन डा. प्रदीप कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. अविनाश पाथर्डीकर ने किया। इस अवसर पर प्रो. डीडी दूबे, प्रो. बीबी तिवारी, डा. वन्दना राय, डा. अजय प्रताप सिंह, डा. समर बहादुर सिंह, डा. विजय सिंह, डा. राकेश सिंह, डा. विनय कुमार सिंह, डा. नरेन्द्र कुमार सिंह, डा. सौम्यसेन गुप्ता, डा. जीडी दूबे, डा. दलसिंगार सिंह, डा. शिल्पा त्रिपाठी, डा. एचएस सिंह, डा. सुबाष चन्द्र बिसोई, डा. नन्दनी श्रीवास्तव, डा. श्रीकांत पाण्डेय, डा. सत्यप्रकाश सिंह, डा. एसपी सिंह, डा. वशिष्ठ यति, डा. जी सिंह, डा. ओमप्रकाश सिंह, डा. मनोज मिश्र, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. सुरजीत यादव, डा. रजनीश भाष्कर सहित परिसर के शिक्षक मौजूद रहे।