Thursday, 8 December 2016

श्री राज्यपाल 9 को विश्वविद्यालय आएंगे


वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में  विज्ञान संकाय द्वारा  ‘‘विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संवर्द्धन एवं बौद्धिक सम्पदा अधिकार संरक्षण हितार्थ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश की भूमिका’’ विषयक  आयोजित संगोष्ठी में शुक्रवार को बतौर मुख्य अतिथि श्री रामनाईक राज्यपाल उत्तर प्रदेश भाग लेंगे। कुलाधिपति के आगमन के मद्देनजर कुलपति प्रोफ़ेसर पीयूष रंजन अग्रवाल ने आज फार्मेसी संस्थान का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया।  विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ मनोज मिश्र ने  बताया कि राज्यपाल उत्तर प्रदेश राम नाईक विश्वविद्यालय में दिन में १२ बजे से १ बजे तक सेमिनार में शिरकत करेंगे।गुरुवार को राज्यपाल के कार्यक्रम की तैयारी  का जिला प्रशासन ने रिहर्सल किया।
आयोजन सचिव डॉ राजेश शर्मा ने बताया कि इस संगोष्ठी मे आई आई टी दिल्ली के प्रोफ़ेसर एस के जैन,नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन गुजरात के निदेशक प्रोफ़ेसर विपिन कुमार,बी एच यू के प्रोफ़ेसर लल्लन मिश्र,प्रोफ़ेसर एच बी सिंह,अवध विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर आर एल सिंह एवं विज्ञान एवं प्रद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश के निदेशक डॉ एम् के जे सिद्दीकी तथा संयुक्त निदेशक डॉ शशि राना विषय विशेषज्ञ के रूप में शामिल हो रहे हैं।

वैज्ञानिक शोध में बौद्धिक सम्पदा अधिकार के महत्व पर सेमिनार का आयोजन




वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के विज्ञान संकाय द्वारा विश्वेश्वरैया हाल में वैज्ञानिक शोध में बौद्धिक सम्पदा    अधिकार के महत्व  पर सेमिनार  का आयोजन  किया गयासेमिनार में शोधार्थियों ने  शोध पत्र प्रस्तुत किये।विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों ने बौद्धिक सम्पदाअधिकार के विविध पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की.

सेमिनार में बतौर विषय विशेषज्ञ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आर एल सिंहने कहा कि आज बौद्धिक सम्पदाअधिकार के बारे सबको जागरूक होने की जरूरत हैइस अधिकारके द्वारा हम अपने श्रम से अर्जित किये गए सृजन का संरक्षण करते है.आज आवश्यकता है इसकेप्रक्रिया की बारीकियों को जानने की.उन्होंने कहा की नीमहल्दी और बासमती का विवाद हमेंसुलझाने में कई साल लग गए.हमने 10 साल के संघर्ष के बाद नीम के पेटेंट को वापस पाया।आजबौद्धिक सम्पदा अधिकार  के सम्बन्ध में जानकारी का अभाव हैइसके प्रति जागरूकता के लिएशोध के क्षेत्र से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी है.

 जनसंचार विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ मनोज मिश्र ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के कार्योंकी चर्चा करते हुए कहा कि हमारी पहली तकनीकी आग का अविष्कार है जिसे हमारे आदि मानवों नेकभी किया होगा,. लेकिन आग की खोज को अपने नाम करने का श्रेय ऋषि अथर्वन  को जाता हैजन जन में जब तक विज्ञान की व्याप्ति नहीं होगी तब तक हम बौद्धिक सम्पदा अधिकार का लाभनहीं ले पाएंगे।
अध्यक्षता करते हुए  विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रोडीडी दूबे ने कहा कि प्राचीन भारतीय सभ्यता एवंसंस्कृति ने विश्व एवं मानवता को अनगिनत  बहुमूल्य विचारों एवं ज्ञान से समृद्ध किया है.  प्रायःसृजनकर्ताओं नेनवीन ज्ञान को  लोक कल्याण के लिए लोगों से साझा करने करने में ही संतुष्ट एवंसार्थकता के बोध का अनुभव किया। हमें अपनी उपलब्धता को उस स्थान तक ले जाना है जो इससेवंचित है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में बौद्धिक सम्पदा अधिकार की जानकारी भौतिक संसार में अपनेअमूल्य जानकारी को देना जरूरी है। जिससे अन्य लोगों द्वारा दुरूपयोग को रोका जा सके तथा नयेज्ञान का सृजन होता रहे। इस अवसर पर आयोजन सचिव  डाराजेश शर्मा द्वारा कार्यक्रम कीरूपरेखा प्रस्तुत की गई.

इस अवसर पर शोधार्थियों द्वारा विज्ञान के शोध में बौद्धिक सम्पदा का अधिकार केमहत्व पर प्रस्तुति दी गईइस  सेमिनार में विषय पर बेहतरीन प्रस्तुति के लिए शेखर आंनद  पांडेय को प्रथम,श्वेता श्रीवास्तव को द्वितीय एवं सिम्प्ल कुमारी को तृतीय स्थान पाने पर  शुक्रवारको राज्यपाल राम नाइक द्वारा पुरस्कृत किया जायेगा। कार्यक्रम का संचालन डाकार्तिकेयशुक्ला एवं  धन्यवाद ज्ञापन  डाएसपी तिवारी  केद्वारा किया गया. 
इस अवसर पर प्रोबीबी तिवारीडाराम नरायन,  डावन्दना रायडाप्रदीपकुमार,डॉ दिग्विजय सिंह राठौर,डॉ अवध बिहारी सिंहडाविवके कुमार पाण्डेयडासुधीरउपाध्यायडाप्रभाकर सिंहडाशुधान्शु शेखर यादवडाविनय वर्माारजनीश भास्करऋषीश्रीवास्तवडासुशील कुमारआशीष गुप्ताडाराजेश कुमारअरविन्द कुमार मौजूद रहे।

Thursday, 17 November 2016

विश्वविद्यालय में स्वच्छता अभियान के समापन सत्र का हुआ आयोजन

साफ-सफाई की आदत को अपने दैनिक दिनचर्या में करें शामिल : कुलपति

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के मुक्तांगन में गुरूवार को स्वच्छता अभियान के समापन सत्र का आयोजन किया गया। 8 नवम्बर से प्रारम्भ हुए स्वच्छता अभियान के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने सफल अभियान की बधाई देते हुए कहा कि
साफ-सफाई की आदत को अपने दैनिक दिनचर्या में शामिल करें। इसी को दृष्टिगत रखते हुए शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारी बन्धुओं ने स्वच्छता के प्रति ली गयी शपथ को सार्थक किया है। उन्होंने उपस्थित सभी से अनुरोध किया कि ऊर्जा की बचत करें एवं कक्षाओं से निकलने वाले विद्यार्थियों से अपेक्षा है कि वे कक्ष की लाइट बंद कर दें इससे पर्यावरण के सुधार में हम देश को अपना अमूल्य योगदान दे पायेंगे। उन्होंने कहा कि ऊर्जा बचत होने से देश के किसानों एवं रोजी रोजगार से जुड़े उद्योगों की कार्यक्षमता में अपार वृद्धि होगी जिससे जहां हमें खाद्यान्न सुरक्षा, शिक्षा के बेहतर अवसर एवं रोजगार की प्राप्ति होगी वहीं हमारा पर्यावरण भी अनुकूल होगा। उन्होंने कहा कि जीवन में सादगी अपनाकर हम पर्यावरण को लम्बे समय तक सुरक्षित रखेंगे। विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि आज महानगरों की हवा में जहर है। हमें इससे सबक लेते हुए घरों में होने वाले उत्सवों के अवसर पर आतिशबाजी को बंद करके समाज में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा कि हम सभी को कागज को बर्बाद करने की आदत से बचना होगा तथा व्यक्तिगत सामानों का पुनउर्पयोग की
आदत डालनी होगी। इससे हम पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति अपना योगदान दे पायेंगे। हमारी इन छोटी-छोटी किन्तु महत्वपूर्ण आदतों से कूड़ों का ढेर और धरती का बोझ दोनों कम होगा।
समापन समारोह के पूर्व विश्वविद्यालय की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं कुलगीत प्रस्तुत किया गया। स्वच्छता अभियान में विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता रहे विद्यार्थियों, कर्मचारियों एवं आवासीय परिसर के बच्चों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर काशी विद्यापीठ में आयोजित पूर्वी क्षेत्र अन्तर विश्वविद्यालयीय हैण्डबाल प्रतियोगिता (महिला) में प्रथम स्थान प्राप्त ट्रॉफी को खेल विभाग के रजनीश सिंह एवं डा. राजेश सिंह ने कुलपति को सौंपा।
इसके पूर्व संयोजक डॉ. मानस पाण्डेय ने स्वच्छता अभियान के प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए आये हुए समस्त लोगों का स्वागत किया। संचालन अशोक सिंह ने किया। इस अवसर पर वित्त अधिकारी एम.के. सिंह, कुलसचिव डॉ. देवराज, उप कुलसचिव संजीव सिंह, टीबी सिंह, डॉ. वीडी शर्मा, डॉ. वंदना राय, डॉ. अविनाश पाथर्डीकर, डॉ. एके श्रीवास्तव, डॉ. रजनीश भाष्कर, डॉ. मनोज मिश्र, डॉ. आशुतोष सिंह, डॉ. राजकुमार, धर्मेन्द्र सिंह, डॉ. अवध बिहारी, डॉ. विवेक पाण्डेय, डॉ. सुशील कुमार, विनय वर्मा, डॉ. केएस तोमर, डॉ. पीके कौशिक, एमएम भट्ट, विनोद तिवारी, डॉ. राजेश जैन, सुशील प्रजापति आदि लोग उपस्थित रहे।